सीधी दर्पण

पिपरोहर में सडक़ के किनारे से निकाली जा रही है मुरुम

कार्रवाई न होने से खनिज माफिया के हौंसले बुलंद

सीधी जबलपुर दर्पण । खनिज माफिया के हौंसले इतने बुलंद हैं कि उनके द्वारा सडक़ के किनारे भी अवैध रूप से मुरुम की खुदाई कराने में कोई गुरेज नहीं किया जा रहा है। सिटी कोतवाली थाना अंतर्गत ग्राम पिपरोहर में सडक़ के किनारे अवैध मुरुम खदान संचालित करने का वीडियो सोशल मीडिया में काफी तेजी के साथ वायरल हो रहा है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार एक सप्ताह पूर्व सोन नदी से अवैध रूप से रेत उत्खनन परिवहन का वीडियो भी पिपरोहर क्षेत्र का सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। जिसके बाद खनिज विभाग की कुंभकरणीय निंद्रा टूटी और टीम मौके पर जांच करने के लिए पहुंची। हैरत की बात तो यह है कि खनिज विभाग की टीम के आने और जांच करने के बाद भी मुरुम का अवैध उत्खनन बंद नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि माफियाओं की सरहंगई यह है कि सडक़ तक खोदकर उनके द्वारा बेंचने में कोई गुरेज नहीं किया जा रहा है। पिपरोहर से मोहनिया सडक़ की हालत खनिज माफियाओं के द्वारा अवैध रूप से मुरुम की खुदाई करने से काफी दयनीय हालत में पहुंच चुकी है। खनिज अधिकारी के यहां ग्रामीणों द्वारा की गई लिखित शिकायत में कहा गया है कि पिपरोहर-मोहनिया रोड में शालिक राम द्वारा अपने पट्टे की भूमि में स्थित भूमि से रेत का अवैध उत्खनन बड़े पैमाने पर करवाया जा रहा है। मिनी ट्रक में 700 रुपए प्रति ट्रिप के अनुसार यहां की अवैध रेत बेंची जा रही है। रेत का अवैध उत्खनन एवं परिवहन होने से मोहनिया एवं पिपरोहर मार्ग का कटाव काफी तेजी के साथ हो रहा है। यहां की आधी से ज्यादा सडक़ अवैध उत्खनन के चलते नष्ट हो चुकी है। यदि यही सिलसिला चलता रहा तो करोड़ों की सडक़ का वजूद भी खनिज माफिया द्वारा खत्म कर दिया जाएगा।
मुरुम के अवैध उत्खनन से धसक रही सडक़-पिपरोहर-मोहनिया मार्ग की हालत अवैध उत्खनन के चलते खस्ताहाल हो चुकी है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी सडक़ के किनारे से अवैध रूप से मुरुम का उत्खनन होने पर सार्थक कार्रवाई नहीं हुई है। खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंची लेकिन जांच करके बैरंग लौट आई। यदि जांच के नाम पर इसी तरह की हीलाहवाली बनी रही तो जल्द ही पिपरोहर-मोहनिया मार्ग अवैध उत्खनन की भेंट चढ़ जाएगी। शासन द्वारा पिपरोहर-मोहनिया मार्ग के निर्माण के लिए हाल ही में लाखों का बजट स्वीकृत कर निर्माण कराया गया था। मुरुम के अवैध उत्खनन में जुटे माफिया द्वारा सडक़ की पटरी की खुदाई शुरू करते हुए अब सडक़ को ही अपना निशाना बनाया जा रहा है। क्षेत्रीय ग्रामीणों में इसलिए चिंता बनी हुई है कि यदि इसी तरह मुरुम का अवैध उत्खनन होता रहा तो आवागवन के लिए बनाई गई समूची सडक़ ही खत्म हो जाएगी। माफिया द्वारा 407 के माध्यम से मुरुम का अवैध उत्खनन एवं परिवहन बड़े पैमाने पर कराया जा रहा है। इस मामले में प्रशासन को गंभीरता पूर्वक मुरुम एवं रेत के अवैध उत्खनन परिवहन में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
धडल्ले से चल रहा रेत चोरी का कारोबार-वायरल वीडियो के मुताबिक पिपरोहर ग्राम से सोन नदी के घाट से अवैध रूप से रेत चोरी का कारोबार अनवरत रूप से जारी है। शिकायतकर्ता के अनुसार सोन नदी के घाटों तक वाहनों के पहुंचने के लिए निजी भूमि स्वामियों से रेत माफियाओं द्वारा गजब का गठजोड़ किया गया है, मुरूम उत्खनन की तरह रेत चोरी करने जाने वाले वाहनों से भूमि स्वामियों द्वारा प्रति ट्रिप शुल्क निर्धारित की गई है और उसी सुविधा शुल्क के बलबूते अपने निजी भूमि से वाहनों को आने जाने की खुली छूट दी गई है। बता दें कि सोन नदी से रेत उत्खनन को लेकर यह क्षेत्र हमेशा से चर्चा में रहा है, लेकिन सब कुछ जानने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

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