फिर सामने आई डीजे प्लाजा प्रबंधन की तानाशाही

पीड़ितों ने लगाया बिना मुआवजा दिए विस्थापन का आरोप
सीधी जबलपुर दर्पण । शहर के सम्राट चौक में निर्माणाधीन डीजे प्लाजा में बिना मुआवजा दिए जबरन जगह खाली करवाने की शिकायत कलेक्टर की जन सुनवाई में 9 दिसंबर को आवेदन देकर की गई है। आवेदन में कहा गया है कि यहां 7 लोगों का परिवार निवासरत है। सभी को आराजी क्रमांक 687 का पट्टा राज्य शासन द्वारा वर्ष 1998 में प्रदान किया गया था। सभी अपना मकान बनाकर आवाद हैं। यह पट्टा स्व. सूर्यमणि राम, दिनेश चौरसिया, छोटेलाल केवट, जगन्नाथ विश्वकर्मा, पूजा विश्वकर्मा, कुशुम विश्वकर्मा को दिया गया था। इसी पट्टे के आधार पर कुशुम विश्वकर्मा, पूजा विश्वकर्मा, जगन्नाथ विश्वकर्मा, छोटेलाल केवट एवं दिनेश चौरसिया को प्रधानमंत्री आवास भी मिला था। आवेदन में कहा गया है कि सभी का प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है फिर भी बिना निराकरण के जगह खाली करवाने का प्रयास किया जा रहा है। रास्ता भी अवरुद्ध कर दो फिट का छोंड़ा गया है। विगत 5 दिसंबर को बिजली विभाग की टीम भी आई थी और उनके द्वारा यहां लगे बिजली के खंबे हटाने की धमकी दी गई। कहा गया कि अगर तीन दिवस के अंदर यहां से नहीं जाते तो बिजली काट दी जाएगी।
नहीं थम रही मनमानी-डीजे प्लाजा शहर वासियों के साथ जहां बड़ी सौगात मानी जा रही थी वहीं अब इस क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। बता दें कि जिस जगह पर राज्य सरकार द्वारा डीजे प्लाजा निर्माण की अनुमति दी गई है वहां पर पूर्व से कई मकान निर्मित है, कई मकानों को बल पूर्वक एवं कानूनी दांवपेच का सहारा लेकर ढहा भी दिया गया है, लेकिन कुछ ऐसे गरीब परिवार के लोग भी यहां निवासरत हैं की उनके सामने रोटी की समस्या बनी हुई है, ऐसे में वह स्वयं के बलबूते नवीन भवन निर्माण कैसे कर सकते हैं सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचे आवेदकों ने जिला प्रशासन को पत्र सौंपकर न्याय दिलाने की गुहार लगाते हुए मीडिया को अपनी पीड़ा सुनाई है। आरोप है कि डीजे प्लाजा प्रबंधन द्वारा जबरदस्ती मकान गिराने की धमकी दी जा रही है, बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी प्रबंधन की ही भाषा बोल रहे हैं।



