धान भुगतान को लेकर किसान सड़क पर, पांचवें दिन भी जारी अनिश्चितकालीन धरना

मनीष श्रीवास जबलपुर दर्पण । जबलपुर जिले में किसानों की उपज धान खरीदी का मामला अब धरना और संघर्ष के बीच शुरू हो गया है। जहां भारतीय किसान 3 फरवरी 2026 से अनिश्चितकाली धरने पर बैठे हुए हैं।
हमारे मीडिया प्रतिनिधि ने जब इन किसानों से जाकर उनसे पूछा गया कि आप किसान धरने पर क्यों बैठे हैं तो आश्चर्य और हैरानी करने वाले तथ्य सामने नज़र आए।
जब जिला प्रशासन ने धान उपज समर्थन मूल्य 2369 रूपये पर खरीदी जिले के विभिन्न वेयर हाउसो में उच्च अधिकारी, स्थानीय अधिकारी एवं कोटवार सहित सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में किसानों की धान खरीदी कराई हैं। अब जब इनके भुक्तान की बात आती हैं। तो उन्हें फर्जी किसान कह दिया गया। इतना ही नहीं किसान पोर्टल रजिस्ट्रेशन भी कुछ समय के लिए बन्द करा दिया गया। जब खरीदी चल रहीं थीं और किसान अपना समय निकाल कर धान प्रशासन की गाइड लाइन के अनुसार वह उन खरीदी केंद्रों में जा कर अपनी मेहनत की उपज फ़सल को रखा।
अब सवाल बार बार जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली और उनके अधिकारियों की लापरवाही पर सवाल खड़े कर रहा हैं?
एक ओर क्षेत्रीय विधायक जहां शुक्रवार को किसान आंदोलन धरना स्थल पर बैठकर उनकी समस्या का समाधान करने की बात तो कहते हैं, वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन से मिल कर नए रास्ते खोजते हुए बात करने को कहते हैं।
पांच दिनों से भारतीय किसान संघ अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर धरने पर बैठा हुआ है।
वर्ष पीछे 24 – 25 में जहां धनाड़ी मां रेवा वेयर हाउस में 90 से अधिक किसानों का भुक्तान 1 एक करोड़ 39 लाख के लगभग नहीं दिया गया। है। इस वेयरहाउस में और भी अनियमिताएं होने को लेकर जिला प्रशासन के द्वारा एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जिसमें कुछ लोगों की गिरफ्तारी एवं जुर्माना के साथ उन्हें जमानत भी दी गई । अब सवाल एक बार फिर श्रीजी वेयरहाउस ग्राम पिपरिया वेयरहाउस का मामला बना हुआ है। यहां 29 जनवरी को श्रीजी वेयरहाउस में जाकर देखा तो सहकारी समिति मझौली के उपार्जन केंद्र क्रमांक 59 33 622 के क्रमांक 1 में किसानों की धान उनकी तौल ऑपरेटर के पास जमा पर्ची के साथ-साथ रजिस्टर में दर्ज किसानों के कांटा पर्ची कटा एवं उपार्जन केंद्र के पोर्टल को दिनांक 13 .01.2026 जनवरी को अचानक बंद करना और रुके हुए किसानों के भुगतान एवं पोर्टल में नाम रजिस्ट्रेशन से स्थानीय ग्रामीण किसान चिंतित और परेशान दिखाई दे रहे हैं।
हमारे प्रतिनिधि मीडिया के समक्ष भारतीय किसान संघ महाकौशल प्रांत के तहसील अध्यक्ष मझौली वीरेंद्र पटेल ने एवं तहसील मंत्री रंजीत पटेल की उपस्थिति में सहकारी समिति के द्वारा किए गए किसानों की धान खरीदी को पोर्टल में चढ़ने एवं भुगतान के संदर्भ में बीते दिवस जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की उपस्थिति में श्रीजी वेयरहाउस में किसानों के भुगतान एवं पोर्टल में नाम दर्ज करने को लेकर विस्तार पूर्वक चर्चा एवं वार्तालाप की थीं।
साथ ही जिले में क्यों उठा 174 फर्जी किसान का मामला – किसान तो किसान हैं चाहे वह ग्रामीण क्षेत्रों का हो या फिर शहर में निवास करने वाला। इस क्षेत्र के 174 किसान फर्जी एवं गलत पाए गए हैं। एसा जिला प्रशासन का मानना।
अब सवाल उठता है ? कि जिला प्रशासन के द्वारा शुरुआती धान की खरीदी से लेकर अंतिम दिवस तक सी सी डी कैमरे की निगरानी,अपर कलेक्टर, जिला अधिकारी, कृषि खाद्य अधिकारी एवं ग्रेडर निरीक्षण सहित कोटवारों की भी ड्यूटी यहां लगाई गई थी ।
साथ ही शासन प्रशासन के द्वारा दो पारियों में खरीदी का कार्य रखा गया था । पहली पारी में महिला समूह के द्वारा खरीदी कराई गई। तो वहीं दूसरी पाली में सहकारी समितियों द्वारा खरीदी कराई गई । इन खरीदी केंद्रों में अहम भूमिका पूर्ण रूप से जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन की थी । उसके बावजूद भी लगातार जब इन किसानों के द्वारा समय रहते ही रजिस्ट्रेशन के लिए पहुंचते थे तो कभी उन्हें पोर्टल बन्द का हवाला तो कभी सॉफ्टवेयर नेटवर्क के प्रॉब्लम को लेकर आगे बढ़ा दिया जाता। किसान बेचारे मजबूर होकर उस बनाए गए सिस्टम और पोर्टल में चक्कर काटते नजर आए । जिससे आज दिनांक तक ना तो इनके पोर्टल में नाम दर्ज हो पाया ना ही इनका खरीदी का भुगतान।
जिसमें इन्हें आश्वासन दिया गया था कि एक सप्ताह में आप की समस्या का निदान कर दिया जाएंगा।
इसके साथ साथ ही भारतीय किसान संघ के द्वारा 30 से 35 किसानों के किसान रजिस्ट्रेशन कोड उनका नाम एवं मोबाइल नंबर सूची जिला प्रशासन को पत्र के माध्यम से जिला समक्ष आवेदन के रूप में प्रस्तुत किया गया था।
धरना पर बैठे सभी किसानों की एक ही मांग हमारा अधिकार हमारा हो भुक्तान।
नहीं तो होगा उग्र आंदोलन की दी चेतावनी।



