भ्रष्टाचार का राज, अब खुलकर फूलों के स्वागत में नजर आया, आवेदनों का खेल, उच्च अधिकारियों ने बनाया, 5 वर्षों में ही कितना गमन कराया?

मनीष श्रीवास जबलपुर दर्पण। जबलपुर जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत एक बड़े भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। यहां जिला प्रशासन को लिखित रूप से आवेदन दिए जाते हैं और अधिकारी आवेदन को शिकायत नहीं मानते हैं। गजब का हैं कनेक्शन बड़े साहबों का?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहरी स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत जिला सहायक कार्यक्रम प्रबंधक (APM) संदीप नामदेव एवं जिला कम्युनिटी मोबिलाइजर (DCM) दीपिका साहू पर महिला आरोग्य समिति के उन्मुखीकरण (Orientation) कार्यक्रम में षड्यंत्र रचकर भारी वित्तीय अनियमितता करने के गंभीर आरोप लगे हैं। जिसकी शिकायत पूर्व में लिखित रूप से की जा चुकीं हैं।
वहीं बड़े बड़े साहबों के इस कार्यक्रम में पेट पूजा की भारी रकम का भी बिल गरीब को देने में वर्षों लगा देते हैं।
भ्रष्टाचारी में जिला बना नम्बर वन –
घोटाले का मुख्य घटनाक्रम –
सफलतापूर्वक कार्य के बाद भी भुगतान में लगा अड़ंगा वित्तीय वर्ष 2021- 2022-23 और 2023-24,2025-2 026 में राज्य कार्यालय की गाइडलाइन के अनुसार महिला आरोग्य समिति के उन्मुखीकरण का कार्य वेंडरों द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया था। लेकिन जब भुगतान की बारी आई, तो सहायक कार्यक्रम प्रबंधक संदीप नामदेव द्वारा कथित तौर पर भारी कमीशन की मांग की गई।
क्यों हुई नोटशीट और ऑनलाइन पोर्टल के साथ छेड़छाड़ – वेंडरों द्वारा कमीशन देने से मना करने पर, संदीप नामदेव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पोर्टल से स्वीकृत नोटशीट ही कैंसिल कर दी।
समय पर खर्च बना बहाना बजट लैप्स होने का झूठा बहाना – वेंडरों को गुमराह करने के लिए अधिकारियों द्वारा यह तर्क दिया गया कि ‘मार्च क्लोजिंग’ के कारण बजट लैप्स हो गया है। इसके पश्चात, जब सीएमएचओ (CMHO) कार्यालय द्वारा विशेष ‘कमिटेड बजट’ मंगवाया गया, तब भी भ्रष्टाचार का खेल जारी रहा।
50% कमीशन की खुली मांग – आरोप है कि कमिटेड बजट आने के बाद संदीप नामदेव की कमीशन की भूख और बढ़ गई और उन्होंने वेंडरों से भुगतान के बदले 50% राशि तक मांग की। मांग पूरी न होने पर बजट को पुन: निरस्त करवा दिया गया।
लगातार दूसरे वर्ष भी वही दोहराव- वर्ष 2023-24 में भी यही प्रक्रिया दोहराई गई। नए बजट के आने के बावजूद, अधिकारियों ने निजी स्वार्थ के चलते बजट का हवाला देते हुए नोटशीट कैंसिल करवा दी। जिससे सरकारी कार्य करने वाले वेंडरों को भारी आर्थिक क्षति हुई है।
जिम्मेदारी वाले प्रशासन से की मांग-
इस पूरे प्रकरण ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित पक्ष और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि:
- संदीप नामदेव और दीपिका साहू के विरुद्ध उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की जाए।
- उनके कार्यकाल के दौरान किए गए समस्त भुगतानों और कैंसिल की गई नोटशीट्स का सत्यापन ऑडिट कराया जाए।
- दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी एफआईआर (FIR) दर्ज कर सेवा से निष्कासित किया जाए।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसे महत्वपूर्ण विभाग में जनता के स्वास्थ्य के लिए आवंटित बजट को निजी जेबों में भरने का यह प्रयास जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है।
इनका कहना – मेरे पास इस सम्बन्ध में कोई भी शिकायत आवेदन नहीं आया हुआ हैं।
राघवेन्द्र सिंह जिला कलेक्टर
इनका कहना नवीन पदस्थ चिकित्सा अधिकारी – मीडिया द्वारा जब स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सा अधिकारी नवीन कोठारी से फोन पर बात हुई तो उन्होंने सीधे ही कह दिया कि मुझे इस विषय पर कोई जानकारी नहीं।


