भोजशाला प्रकरण में जबलपुर के डॉ.एच.पी. तिवारी हैं याचिका कर्ता

जबलपुर दर्पण । धार के बहुचर्चित भोजशाला बनाम कमाल मौला मस्जिद प्रकरण पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए इसे हिंदू मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र बताकर हिंदू पक्ष को सौंपने की बात कही। इस प्रकरण पर नगर के समाज सेवी डॉ.एच. पी.तिवारी भी मूल याचिका कर्ता हैं। डॉ.एच.पी.तिवारी ने उच्च न्यायालय के फैसले पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे सनातन धर्म और सनातन परंपरा की जीत निरूपित किया। डॉ.तिवारी ने बताया कि उनकी याचिका क्रमांक 10484/2022 में बहस के दौरान भोजशाला के स्तंभों में अंकित हिंदू प्रतीकों, राजा भोज की पुस्तक समरांगण सूत्रधार में वर्णित भोजशाला से मिलते जुलते तथ्यों तथा एएसआई द्वारा परिसर में की गई खुदाई में प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष बेहद मजबूती से रखा गया था। और उन्हें पूरा विश्वास था कि फैसला उनके पक्ष में ही आएगा। डॉ.तिवारी ने बताया कि यह परिषर वास्तव में राजा भोज द्वारा निर्मित मां सरस्वती का विख्यात मंदिर तथा वैदिक व संस्कृत शिक्षा का विश्व विख्यात केंद्र था जहां पूरी दुनिया से ज्ञान पिपासु विद्यार्थी ज्ञानार्जन हेतु आते थे। कालांतर में इस्लामिक आक्रांताओं द्वारा इस पर कब्जा कर इसे मस्जिद का रूप दे दिया गया। 17 मार्च 2026 को उनकी उपस्थिति में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश द्वय न्याय मूर्ति श्री विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति श्री आलोक अवस्थी द्वारा स्वयं भोजशाला का निरीक्षण करने और उसके बाद 6 अप्रैल से केश की नियमित सुनवाई करने का निर्णय के बाद तनिक भी संदेह नहीं रह गया था कि फैसला हिंदुओं के पक्ष में ही आएगा।



