जबलपुर दर्पण

मानदेय भुगतान में देरी से भड़का आक्रोश आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर कार्यालय घेरा

मनीष श्रीवास जबलुपर दर्पण । जबलपुर जिले में आशा और पर्यवेक्षक कार्यकर्ताओं का गुस्सा उस समय देखने को मिला जब सोमवार की दोपहर 2 बजे के दौरान सड़कों सहित जिला कलेक्टर कार्यालय में दिखाई दिया। प्रदेश महासचिव पूजा कनौजिया ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि हम आशा, ऊषाओं का वेतन विसंगति, लंबित भुगतान और एक आशा कार्यकर्ता को सेवा से हटाए जाने के विरोध में एक सैकड़ा से अधिक संख्या में आशा कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में पहुंचकर प्रदर्शन किया।
वहीं इन प्रदर्शनकारियों ने जिला अधिकारियों पर भुगतान में अनियमितता के गंभीर आरोप भी लगाए ? साथ ही चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो विधानसभा सत्र के दौरान बड़ा आंदोलन भी किया जा सकता हैं। क्यों एकत्रित हुई आशा, उषा कार्यकर्ता – जिला कलेक्ट्रेट परिसर में जुटीं आशा और पर्यवेक्षक कार्यकर्ताओं ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर विरोध जताते हुए नारेबाजी की। इस विरोध प्रदर्शन में संयुक्त मोर्चा की प्रदेश महासचिव पूजा कनौजिया ने कहा कि आशा कार्यकर्ता गांव-गांव और शहर-शहर में पूरी निष्ठा, ईमानदारी के साथ स्वास्थ्य सेवाओं का दायित्व निभाती हैं, लेकिन उनके मानदेय के भुगतान में लगातार लापरवाही बरती जा रही है। अभी उनका सीधा आरोप है कि फरवरी महीने का भुगतान रोक कर सीधे मार्च और अप्रैल का भुगतान किया गया। जिससे पारिश्रमिक में भी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रहीं है।

इनकी मुख्य मागे – प्रदर्शन के दौरान आशा , उषा कार्यकर्ताओं ने मांग उठाई कि हर महीने के काम का स्पष्ट वेतन पर्ची दी जाए और समय पर भुगतान भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि मजदूर का पसीना सूखने से पहले मजदूरी देने का नियम आशा कार्यकर्ताओं पर भी लागू होना चाहिए। इनका सीधा कहना है कि कई कार्यकर्ताओं के परिवार की आजीविका इसी मानदेय पर निर्भर है। लेकिन भुगतान में अधिक देरी से उनके लिए गंभीर आर्थिक संकट भी पैदा कर रही है।
पूजा कनौजिया, प्रदेश महासचिव, संयुक्त मोर्चा का कहना – प्रदेश महासचिव कार्यकर्ताओं ने पनागर की एक आशा कार्यकर्ता को सेवा से हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि संबंधित जनप्रतिनिधि द्वारा माफीनामा दिए जाने के बाद भी अधिकारी उसे वापस काम पर नहीं रख रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अन्य आशा कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाने की कोशिश है, जिसे वे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगी।
नवीन कोठारी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी के समक्ष रखीं अपनी बात – आशा, उषा आंदोलन कारी ने सरकार से मांग रखीं कि हर महीने की 5 तारीख तक हम सभी आशा कार्यकर्ताओं का पूरा भुगतान किया जाए। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के अनुसार मानदेय में भी वृद्धि की जाए। और लंबित मांगों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आगामी विधानसभा सत्र के दौरान राजधानी में बड़ा घेराव और उग्र आंदोलन किया जाएगा।
फिलहाल आशा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और भुगतान व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना हैं कि सरकार और जिला प्रशासन इन मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं और इन आशा , उषा कार्यकर्ताओं को कब तक राहत मिलती है।

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