प्रस्तावित यूसीसी से मौलिक अधिकारों के रक्षा की मांग

जबलपुर दर्पण । सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) की ओर से जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम सोपे गये
ज्ञापन में कहा गया कि भारत का संविधान देश की विविध धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक परंपराओं का सम्मान करते हुए प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता, समानता एवं गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार प्रदान करता है। इसी संवैधानिक भावना के अनुरूप हम निम्नलिखित विषयों पर अपना गंभीर विरोध एवं चिंता व्यक्त करते हैं।
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा समान सिविल संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में की जा रही पहल ऐसे समय में की जा रही है, जब इस विषय पर देशव्यापी सहमति नहीं बन सकी है। हमारा मानना है कि यह विषय करोड़ों नागरिकों की धार्मिक आस्थाओं एवं व्यक्तिगत कानूनों से जुड़ा है। अतः सभी धर्मों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों एवं नागरिक समाज से व्यापक संवाद और सहमति के बिना इस प्रकार का कानून लागू किया जाना संविधान की भावना एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं होगा।
इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न भागों में मुस्लिम समुदाय के विरुद्ध घृणा फैलाने वाले भाषण, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, भीड़ हिंसा, धार्मिक स्थलों एवं धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े विवादों की घटनाएँ सामाजिक सौहार्द के लिए गंभीर चुनौती हैं। ऐसी घटनाओं पर निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है।
इसी प्रकार प्रदेश में दलित एवं आदिवासी समाज पर अत्याचार, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा, भूमि अधिकारों का हनन, सामाजिक भेदभाव तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी लगातार चिंताएँ व्यक्त की जाती रही हैं। संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25 एवं 29 सभी नागरिकों को समान संरक्षण एवं अधिकार प्रदान करते हैं, जिनका पूर्णतः पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
अतः महामहिम से हमारा विनम्र निवेदन है कि—
मध्यप्रदेश में समान सिविल संहिता लागू करने की प्रक्रिया पर पुनर्विचार कराया जाए तथा सभी हितधारकों से व्यापक संवाद के उपरांत ही कोई निर्णय लिया जाए।
प्रदेश एवं देश में मुस्लिम समुदाय के विरुद्ध होने वाले घृणा अपराधों, सांप्रदायिक हिंसा एवं भेदभावपूर्ण घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
दलितों एवं आदिवासियों पर होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएँ तथा एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम का सख्ती से पालन कराया जाए।
सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय एवं विधि के शासन की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
प्रदेश में शांति, भाईचारा, सामाजिक सद्भाव एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने हेतु आवश्यक निर्देश जारी किए जाएँ।
हमें पूर्ण विश्वास है कि महामहिम संविधान की मूल भावना, सामाजिक न्याय तथा भारत की बहुलतावादी परंपरा की रक्षा हेतु इस ज्ञापन पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी। इस अवसर पर प्रदेश महासचिव इरफान उल हक अंसारी, जिला प्रभारी मोहम्मद अजहर, मोहम्मद
मुजाहिद, नियाज अहमद, घनश्याम यादव, शहाबुद्दीन, महमूद अहमद, महमूद भारती आदि उपस्थित रहे।



