अधिवक्ता संघ रीवा के चुनाव को चुनौती, हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

जबलपुर दर्पण । अधिवक्ता कामता प्रसाद तिवारी, ध्रुव नारायण शुक्ला, डी.एस. ओझा एवं दिनेश त्रिपाठी द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत कर जिला अधिवक्ता संघ, रीवा की वर्ष 2026 की संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया तथा 25.04.2026 एवं 27.04.2026 को घोषित चुनाव परिणाम को निरस्त किए जाने की प्रार्थना याचिका में की गई है।
दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि अधिवक्ता संघ का चुनाव निर्धारित नियमावली के अनुरूप नहीं कराया गया। मतदाता सूची अधिवक्ता संघ द्वारा तैयार करने के बजाय राज्य अधिवक्ता परिषद की सूची के आधार पर मतदान कराया गया, जबकि उसमें शासकीय कर्मचारियों तथा मृत व्यक्तियों के नाम भी शामिल थे।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा है कि चुनाव के दौरान अध्यक्ष पद के लिए 20 वर्ष तथा सचिव पद के लिए 15 वर्ष के अधिवक्ता अनुभव की पात्रता का उल्लेख मॉडल बायलॉज की कंडिका-8 के आधार पर किया गया, किंतु अध्यक्ष पद के प्रत्याशी विजय विक्रम सिंह का नामांकन स्वीकार कर लिया गया, जबकि याचिका के अनुसार वे निर्धारित अनुभव की पात्रता पूरी नहीं करते थे।
याचिका में यह भी कहा गया है कि निर्वाचन अधिकारियों से चुनाव किस नियमावली के अंतर्गत कराया जा रहा है, इसकी जानकारी मांगी गई, लेकिन स्पष्ट उत्तर देने के बजाय केवल स्टेट बार की वेबसाइट देखने की बात कही गई। साथ ही, उच्च न्यायालय द्वारा महिला आरक्षण संबंधी जारी आदेश का पालन नहीं किया गया तथा आरक्षित पदों का उल्लेख मतपत्रों में नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि अधिवक्ता परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले ऐसे व्यक्तियों को भी मतदान कराया गया जो मतदाता बनने के पात्र नहीं थे। इसके अतिरिक्त कार्यकारिणी के केवल पांच पदों के लिए चुनाव कराया गया, जबकि सात सदस्यों की कार्यकारिणी घोषित कर दी गई, जो चुनाव नियमों के विपरीत बताया गया है। याचिका में मुख्य निर्वाचन अधिकारी सूर्यनाथ पांडे पर भी निष्पक्षता को लेकर प्रश्न उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनके पुत्र मनोज पांडे राज्य अधिवक्ता परिषद के सदस्य पद के प्रत्याशी थे, जिससे हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई और निर्वाचन नियमों की अनदेखी करते हुए चुनाव प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं की गईं।
प्रथम दृष्टया प्रकरण पर विचार करते हुए उच्च न्यायालय ने समस्त दस्तावेजों का अवलोकन कर अनावेदकगण को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता गोपाल सिंह बघेल एवं अधिवक्ता विनय प्रताप सिंह बघेल ने पक्ष रखा।



