जालसाज पटवारी का ईओडब्ल्यू.ने किया पर्दाफाश ,किसानों के नाम का बनाता रहा फर्जी चालान

मनीष श्रीवास जबलपुर/सिवनी । मध्यप्रदेश जबलपुर ई ओ डब्ल्यू ने सिवनी जिले में पदस्थ एक ऐसे होशियार शातिर पटवारी अरुण कुमार सनोडिया को दबोचा है। जिसने किसानों से उनकी लगान और डायवर्सन के नाम पर पैसा लेकर फर्जी चालान बनाता रहा । तथा किसानों के खून-पसीने की गाड़ी कमाई निगल गया । इस भ्रष्ट पटवारी फर्जी चालान बनाकर शासन और जनता को लगभग 6 लाख का चूना भी लगा दिया। सिवनी जिले के शासकीय महकमे में बड़ा फर्जीवाड़ा के मामला सामने आते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। शातिर पटवारी ने फोन-पे पर टैक्स के पैसे मंगाए फिर खुद ही प्रिंट कर के फर्जी सरकारी चालान दे दिए। सच्चाई उजागर होने के बाद आरोपी पटवारी अरुण सनोडिया के खिलाफ एफआईअार दर्ज कर ली गई है। यह सब घटनाक्रम दिनांक- दिनांक 1 मार्च 24 से दिनांक 31 अगस्त 24 के बीच घटित हुई थीं। आरोपी पटवारी हल्का नं 11 कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), अनुविभागीय दण्डाधिकारी, जिला सिवनी में पदस्थ है। किसानों के साथ ठगी करने वाले पटवारी अरुण सनोडिया ने बड़े ही शातिराना तरीके से सरकारी खजाने में राजस्व राशि जमा करने के बजाय, फर्जी चालान तैयार करके भ्रष्टाचार को अंजाम दिया। खुलासा होने के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ जबलपुर ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की नई और बेहद सख्त धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर शिकंजा कस दिया है।
ऐसे हुआ उजगार पूरा मामला- पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब एकता कॉलोनी, सिवनी के निवासी राजकुमार साहू ने जबलपुर में आकर ईओडब्ल्यूमें शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित को वर्ष 2007 से 2025 तक के अपने मकान का टैक्स (राशि 5,400 रुपये) चुकाना था। पटवारी अरुण सनोडिया ने शातिर दिमाग लगाते हुए 31 अगस्त 24 को यह राशि अपने पास ऑनलाइन ट्रांसफर करवा ली और पीड़ित को 30 अगस्त 24 की तारीख का चालान थमा दिया। जब पीड़ित ने इस चालान को सरकारी ऑनलाइन पोर्टल पर चेक किया, तो उसका कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिला। चालान पूरी तरह जाली था और टैक्स के पैसे सरकारी खाते के बजाय पटवारी की जेब में जा चुके थे। इसी तरह, एक दूसरा अन्य पीड़ित रामकुमार कुशवाहा को भी इस शातिर पटवारी ने 89,550 रुपये का फर्जी चालान थमाकर ठगी का शिकार बनाया था। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जब तत्कालीन एसडीएम सिवनी ने जिला कोषालय अधिकारी से इन चालानों का सत्यापन कराया, तो दोनों चालान सरकारी पोर्टल से गायब (फर्जी) पाए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम ने पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।
खुले शातिर पटवारी के बड़े कारनामे- विभागीय जांच शुरू होने के बाद आरोपी पटवारी के काले कारनामों की परतें खुलती चली गईं: 1. केस नं. 3 (सुनील नाहर): भू-स्वामी सुनील नाहर ने अपनी भूमि (खसरा नं. 412/1 एवं 413/1) के लगान हेतु पटवारी को फोन-पे के माध्यम से 44,856 रुपये ट्रांसफर किए थे। पटवारी ने उन्हें 6,300 और 32,001 रुपये के दो चालान दिए। जांच में पता चला कि 32,001 रुपये वाले चालान के एवज में सरकारी पोर्टल पर केवल 21,300 रुपये ही दर्ज थे, यानी सीधे तौर पर 17,256 रुपये का गबन किया गया।
- केस नं. 4 (शीतल चंद भूरा) जांच के दौरान सबसे बड़ा झटका तब लगा जब शीतल चंद भूरा के नाम पर जारी 5,04,000 रुपये का एक और भारी-भरकम चालान मिला। जब इस चालान को ट्रेजरी और ऑनलाइन पोर्टल पर सर्च किया गया, तो यह पूरी तरह गायब (फर्जी) पाया गया । प्रथम दृष्टया यह सिद्ध हो चुका है कि आरोपी पटवारी ने सुनियोजित तरीके से शासन को करीब 6 लाख रुपये की आर्थिक क्षति पहुँचाई है।
केस में शुरू की विवेचना– ईओडब्ल्यूजबलपुर ने आरोपी अरुण कुमार सनोडिया के खिलाफ अपराध क्रमांक 83/2026 दर्ज कर विवेचना में लिया है। आरोपी पर नए कानून की निम्नलिखित धाराएं लगाई गई हैं। धारा 316(5), 337, 336(3), 340(2) भारतीय न्याय संहिता 2023 (धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज बनाना और गबन)।
धारा 7(सी) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित 2018) के तहत मामला दर्ज करते हुए विवेचना के साथ जॉच शुरू कर दी है।


