कांग्रेस ने कटनी को जिला व नगर निगम बना रखी महानगर की नींव: करण सिंह चौहान

सतीश चौरसिया उमरियापान । जिला शहर एवं ग्रामीण कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष व छिंदवाड़ा प्रभारी करण सिंह चौहान ने एक विस्तृत ऐतिहासिक व विकासात्मक बयान जारी करते हुए कहा है कि कटनी का इतिहास सिर्फ एक कस्बे का नहीं, बल्कि पिछले 100-150 वर्षों में क्रमिक रूप से विकसित हुए एक बड़े औद्योगिक व रणनीतिक महानगर का है । उन्होंने कहा कि आज से 29 वर्ष पूर्व कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार ने कटनी को जिला और नगर पालिक निगम का दर्जा देकर इसके आधुनिक महानगर बनने का मार्ग प्रशस्त किया था । श्री चौहान ने कटनी के शहरीकरण के अति महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहरा अध्ययन प्रस्तुत करते हुए बताया कि कटनी के विकास की नींव मुख्य रूप से रेलवे, डिफेंस और भारी उद्योगों के त्रिकोण पर टिकी है, जिसने इसे एक गांव से महानगर के रूप में बदला है सबसे पहले रेलवे और कनेक्टिविटी: शहरीकरण का मुख्य इंजन- करण सिंह चौहान ने ऐतिहासिक तथ्यों को रेखांकित करते हुए बताया कि कटनी के शहरीकरण की शुरुआत ईस्ट इंडियन रेलवे द्वारा वर्ष 1867 में जबलपुर- इलाहाबाद रेल लिंक से कटनी स्टेशन की स्थापना के साथ हुई थी। फिर वर्ष 1891 में कटनी-बिलासपुर रेल मार्ग और 1898-1899 में कटनी-दमोह-सागर रेल लाइन पर पैसेंजर ट्रेनों का परिचालन शुरू हुआ। वर्ष 1972 में कटनी-सिंगरौली रेल मार्ग पूरी तरह शुरू हुआ । सबसे बड़ा मील का पत्थर वर्ष 1962 में स्थापित हुआ, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश के सबसे बड़े डीजल लोको शेड न्यू कटनी जंक्शन – NKJ की आधारशिला रखी। इसने अकेले 5,000 से अधिक परिवारों को सीधा रोजगार देकर कटनी को एक बड़े ‘रेलवे टाउनशिप’ के रूप में स्थापित कर दिया ।
दूसरा महत्वपूर्ण डिफेंस और औद्योगिक क्रांति से बदला स्वरूप- कटनी के भौगोलिक महत्व को देखते हुए ब्रिटिश काल में वर्ष 1942 में ऑर्डनेंस फैक्ट्री की स्थापना की गई, जहां 5,000 से अधिक परिवार को रोजगार मिला इसने कटनी के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को पूरी तरह बदल दिया ।
इसके अलावा: वर्ष 1923 में कैमोर में देश का सबसे बड़ा एसीसी (ACC) सीमेंट प्लांट पोर्टलैंड सीमेंट शुरू हुआ, जो 1936 में एसीसी और अब अडाणी सीमेंट के रूप में संचालित है । वर्ष 1934 में एस्बेस्टस सीमेंट लिमिटेड के रूप में एवरेस्ट प्लांट, कैमोर की स्थापना हुई। इसीप्रकार वर्ष 1952 में प्रचुर बॉक्साइट खनिजों के चलते ‘एसीसी रिफ्रैक्ट्री सेरेमिक प्लांट’ (अब कैलडरीज इंडिया) की नींव रखी गई । वर्ष 1970 में भारत सरकार ने बोकारो स्टील प्लांट के लिए ऐतिहासिक ‘कोटेश्वर चूना पत्थर खदान’ को मंजूरी दी, जिससे हजारों मजदूरों और स्थानीय व्यापार को गति मिली । पूर्वजों और नेताओं के योगदान को कम आंकना गलत पूर्व जिला अध्यक्ष करण सिंह चौहान ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आज यदि कोई यह कहता है कि “कटनी अभी भी एक छोटा शहर है” तो यह गलत है । कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार ने वर्ष 1993 – 1994 में दूरदर्शिता दिखाते हुए कटनी को नगर पालिका से अपग्रेड कर नगर पालिक निगम बनाया और फिर जिला मुख्यालय की सौगात दी गई । वर्तमान में जिले की 8 तहसीलों में से अधिकांश कांग्रेस शासनकाल की ही देन हैं ।



