सेहड़ा पुल में मेंटिनेंस के नाम पर करोड़ो का गोलमाल

सीधी जबलपुर दर्पण । जिला मुख्यालय से मड़वास टिकरी मार्ग में लगातार बढ़ते वाहनों की संख्या को देखते हुए इसे फोर लेन सड़क निर्माण में शामिल किया गया है, लेकिन इन दिनों एमपीआरडीसी द्वारा सरकारी बजट को खुर्दबुर्द करने के उद्देश्य से करोड़ों रुपए की चपत लगाई जा रही है।उल्लेखनीय हैं कि जिले के सांसद डॉ राजेश मिश्रा द्वारा मार्च 2025 में सीधी से टिकरी, मड़वास, पथरौला तक कुल 37 किलोमीटर फोर लेन सड़क स्वीकृत कराया है। सीधी बायपास से टिकरी तक ऊक्त सड़क वर्तमान में पीडब्लूडी में आती है व टिकरी से मड़वास, पथरौला तक कि सड़क महुवा चुवाही के नाम से एमपीआरडीसी के अंतर्गत आती है। विगत माह एमपीआरडीसी के अधिकारियों ने ठेकेदार से सांठगांठ कर करीब 91 लाख रुपये का मेंटिनेंस का स्टिमेट तैयार कर ठेकेदार श्री त्रिपाठी को बिना टेंडर काम दे दिया जबकि ऊक्त पुल नवीन स्वीकृत फोर लेन से नई एवं चौड़ी बननी ही है। ऐसे में आनन फानन में इस सड़क का मरम्मतीकरण एवं पुल निर्माण यह साफ बता रहा है कि एमपीआरडीसी के अधिकारियों द्वारा अपने एवं ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपए पानी में बहाया जा रहा है। हालांकि एमपीआरडीसी द्वारा कराए जा रहे इस निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया है, अगर समय रहते इसे नहीं रोका गया तो जनांदोलन भी हो सकता हैं।बॉक्स बिना टेंडर नियम विरुद्ध हो रहा निर्माण कार्यबता दें कि ऊक्त सेहड़ा पुल में जो मेंटिनेंस का कार्य बारिश के मौसम में कराया जा रहा है वह काफी घटिया और मानक प्राक्कलन के विरुद्ध है। ठेकेदार द्वारा अधिकारियों के मिलीभगत से पुल के निचले भाग प्लिंथ में टूटे हुये भाग में सीमेंट और घटिया क्वालिटी की रेत व अन्य मटेरियल मिलाकर कंक्रीट करने की तैयारी की जा रही हैं वही पुल के पावा की दीवाल में पतली जाली लगकर सीमेंट का घोल पिलाया जा रहा है जबकि पुल के सभी पावा व दीवाल सुरक्षित हैं। ऐसे में मेंटिनेंस के नाम पर लीपापोती करके आम जनता व सरकार के पैसे को हजम करने की तस्वीर साफ दिखाई दे रही है।बॉक्स गैरजरूरी काम का बनाया गया स्टीमेट विभाग द्वारा पुल में जिन कार्यो की जरूरत ही नही थी उसे भी स्टीमेट में शामिल किया गया है जबकि पुल के चारो कोने में सिर्फ 5 मीटर का ट्रो-वाल ही काफी था। उसमे भी 2 किनारे अभी भी सुरक्षित हैं सिर्फ पुल के पूर्व साइड में पुल के दोनो किनारों पर कुछ मिट्टी का कटाव था। लेकिन विभाग द्वारा करोड़ो की राशि निबटाने ऐसी जुगत लगा ली है जो कि हैरान करने वाली है। देखना यह है कि ग्रामीणों की तरह जिले जिम्मेवार अधिकारी, निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी सरकार के धन को दुरूपयोग होने से बचाने में सक्रियता दिखाते हैं या फिर एनी मामलों की तरह यह भी मामला ठंडे बस्ते में चला जायेगा।



