लाॅकडाउन में बाॅलीवुड का रोजा और ईद

लेखक: शामी एम् इरफ़ान, मुम्बई। कभी-कभी ऐसा लगता है कि, बाॅलीवुड के अधिकांश मुसलमान नकली हैं, बस नाम के मुसलमान हैं, ना रोजा रखते हैं, ना नमाज पढ़ते हैं और उन्हें रोजा, नमाज, इबादत से कोई मतलब नहीं है। वहीं कुछ गैर मुस्लिमों द्वारा जिस पाबंदी के साथ रोजा रखा जाता है तो, लगता है यही सच्चे मुसलमान हैं। या यूँ कहिये, यही सचमुच में इंसान हैं। यह तो बाॅलीवुड की रगों में बहने वाला ऐसा खून है, जिसमें जात-पात, मजहब का कोई भेदभाव नहीं है। यही वजह है कि एक-दूसरे के त्योहार सभी घुल-मिल कर मनाते हैं और उनके मजहब की शिनाख्त नहीं कर सकते।
नाम बदल कर फिल्मों में काम करने की पुरानी परम्परा रही है। बहुत लोगों ने अपने नाम बदले हैं लेकिन अपने मजहब नहीं बदले। अन्तर्जातीय विवाह भी किया लेकिन एक-दूसरे पर मजहब बदलने का दबाव नहीं डाला। कोई अपनी मर्जी से अपने आपको बदल ले और जन्म के साथ संस्कार में मिला धर्म बदल ले तो, ऐसा कुछेक अपवाद ही हैं। अन्यथा एक ही घर में पूजा और नमाज की इबादत करते, अपनी आस्था के अनुसार मन्दिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारा जाते बाॅलीवुड के लोगों को देखा गया है। डाक्टर राही मासूम रज़ा साहब ने तो अपने बेटे नदीम खान को पार्वती से शादी करने की मंजूरी इस शर्त पर दी थी कि, पार्वती अपना धर्म नहीं बदलेगी। यह सब लिखने और नाम गिनाने की आवश्यकता नहीं है।
बाॅलीवुड में अंतर्जातीय विवाह बहुत लोगों ने किया है और उन्हें अपने परिवार का भरपूर सहयोग मिला है। ऐसे कई लोगों ने नाम शोहरत दौलत हासिल करके अपना एक अलग मुकाम बनाया है। तकरीबन ऐसे परिवारों में सभी धर्मों का अनोखा संगम देखने को मिलता है। जहाँ रोजा भी रखा जाता है, ईद भी मनाई जाती है। गणपति और दीवाली भी हर्षोल्लास के साथ मिलकर मनाया जाता है। लाॅकडाउन के कारण इस वर्ष होली रंग-बिरंगी नहीं थी। लाॅकडाउन में ही रमजान शुरू हुआ, जो अब पूरा होने को है और इस बार बाॅलीवुड में रमजान का पहले जैसा माहौल कहीं भी देखने को नहीं मिला। रोजा इफ्तारी की पहले वाली पार्टी नहीं हुई। रात में घूमकर लोगों ने खरीदारी नहीं करी। सेहरी के लिए जगाने कोई नहीं नहीं निकला। रमजान वाले गीत नहीं गूँजे। तो क्या बाॅलीवुड के लोगों ने रोजे नहीं रखे? इबादत नहीं की? दान, खैरात, जकात नहीं दिये क्या? सबने सब कुछ किया है और बहुत कुछ दिया है, सब कुछ पहले जैसा किया है, बस थोड़ा – सा तरीका बदला हुआ है। क्योंकि लाॅकडाउन के चलते लोग-बाग अपने घरों के अंदर रहने के लिए विवश हैं और भीड़ लगाने की परमीशन नहीं है। रमजान में रातों को लगने वाले बाजार भी नहीं सजे इस बरस और मस्जिद में नमाज पढ़ नहीं पाये, एक साथ बैठकर इफ्तारी कर नहीं पाये, फिर भी सब कुछ सादगी से, पाकीजगी के साथ चल रहा है।
ईदगाह में ईद की नमाज होगी, इसमें संदेह है। हालांकि, कुछ सिरफिरे ईद की नमाज एक साथ पढ़ने की मांग कर रहे हैं। जो पांच वक्त की नमाज़ पढ़ने से कतराते हैं। मुस्लिम होने का ढोंग करते हैं। बेशक वही लोग लाॅकडाउन लिफ्ट करने के लिए कह रहे हैं और ईदगाह में नमाज पढ़ने की बात कर रहे हैं। रोजा रखकर शूटिंग रिकार्डिंग करने वाले कलाकारों को इस बार काम नहीं करना पड़ा। मुस्लिम, गैर मुस्लिम चुपचाप रोजा इबादत का पालन कर रहे हैं। फिल्मकार गुलज़ार साहब, जो पंजाबी सरदार हैं, सालो से हमेशा रोजा रखते आ रहे हैं और कभी उन्होंने इसकी पब्लिसिटी नहीं चाही। अभिनेता व निर्देशक रामा मेहरा भी पिछले चार-पांच सालों से पूरे रोजे रखता है। संघर्षरत अभिनेत्री रेखा शर्मा भी रोजा रखती है। मेरी व्यक्तिगत जानकारी में बीस-तीस गैर मुस्लिम पूरा रोजा रख रहे हैं। बहुत से बाॅलीवुड के गैर मुस्लिम हैं, जो रोजा रखते हैं, उन्होंने अपना नाम प्रकाशित करने के लिये मना किया है। बाॅलीवुड और देश के तथाकथित भौकाली मुसलमानों को ऐसे लोगों से नसीहत लेनी चाहिए ना कि, दिखाने और बताने के लिए रोजेदार बन जाओ और घर के अंदर दबाकर खाते-पीते रहो।
एक बात मेरी समझ में नहीं आती कि, राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करने वाले बाॅलीवुड के ज्यादातर लोग रोजा-नमाज के पाबंद क्यों नहीं हैं? कोई अपनी, उम्र, सेहत तो कोई किसी बीमारी का बहाना बनाकर अपने फर्ज से दूर हो जाता है। ऐसे लोगों को सिर्फ ईद की नमाज़ के लिए देखा गया है। कुछ ने तो ईद पर नये कपड़े पहन लिया और सिर पर टोपी लगा ली बस मुसलमान बन गये। बाकी दिनों में नमाज इबादत यह कब करते हैं, खुद उनको भी नहीं मालूम। इस बार तो तथाकथित मुसलमानों के पास ईद की नमाज़ ना पढ़ने का लाॅकडाउन बहुत बेहतरीन बहाना है। सोशल मीडिया पर पुरानी तस्वीरें डालकर सभी अपनी भड़ास निकालेगे। महबूब खान, कमाल अमरोही, के आसिफ, शेख मुख्तार, मुराद, इफ्तिखार, कादर खान, निम्मी, महमूद, दिलीप कुमार, सायरा बानो, शब्बीर कुमार, मोहम्मद अजीज, तलत अजीज, शकीला बानो, रेहाना सुल्ताना, नदीम, शगुफ्ता अली, इरफ़ान खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, शारिब हाशमी, मुश्ताक खान, अली खान, रजा मुराद तमाम ऐसी फिल्मी हस्तियाँ इस बात की मिसाल हैं, जो रोजा नमाज पाबंदी के साथ करते हुए अपना काम भी करते रहे हैं।
अंत में यह भी बता दें कि, इस बार किसी बाॅलीवुड स्टार्स के यहाँ ईद की सिवंई भी खाने को नहीं मिलेगी। मुम्बई कोरोना संक्रमित शहरों में रेड जोन के अंतर्गत है। लाॅकडाउन का चौथा चरण चल रहा है और यहाँ पर लाॅकडाउन बढ़ने की पूरी संभावना है। फोन पर, व्हाट्स अप पर ईद की बधाई, शुभकामनाएं लीजिये – दीजिये और गले मिलने से बचिये। लॉक डाउन का पालन करिये, प्रशासन का साथ दीजिये। अपने – अपने घरों में रहिये, अनावश्यक घर से बाहर ना निकलिये और सुरक्षित रहिये। जान है तो जहान है। आज की इंसानियत की यही डिमान्ड है। (वनअप रिलेशंस)



