जब चलित प्रयोगशाला पहुँची- सेमरखापा, टिकरिया और बनियातारा, देखा गया बच्चों में उत्साह


मंडला, दर्पण । जिला में कलेक्टर मंडला श्रीमती हर्षिका सिंह द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में एक अभिनव पहल की शुरुआत की गई है ।इस प्रोजेक्ट का नाम दिया गया है – नई उड़ान -जिसे पूरे जिले में लागू किया गया है ।प्रोजेक्ट नई उड़ान का ही एक अंग है, “चलित प्रयोगशाला ” चलित प्रयोगशाला एक ऐसी प्रयोगशाला है जो कि सुदूर ग्रामीण अंचलों के ग्राम पंचायतों में जाकर उस क्षेत्र में अध्ययनरत स्कूली छात्र छात्राओं प्रायोगिक कार्य को समझाने का कार्य कर रही है।बता दें कि कोविड- 19 के कारण विद्यालय नियमित रूप से विधिवत नही लग पा रहे हैं।पढ़ाई ऑनलाइन चालू है ,पर प्रायोगिक कार्य बंद पड़े थे।यह कार्यक्रम पूरे नवंबर माह में संचालित रहेगा। इसके अंतर्गत विगत दिवस यह चलित प्रयोगशाला प्राचार्य अखिलेश चंद्रोल के कुशल मार्गदर्शन में ग्राम पंचायत सेमरखापा , ग्राम पंचायत टिकरिया एवम ग्राम पंचायत बनियातारा पहुँची।सरपंच,उपसरपंच, सचिव और पालकों का पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ ।कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए प्राचार्य अखिलेश चंद्रोल द्वारा स्प्रे मशीन से कार्यक्रम स्थल को सेनेटाइज करवाया गया,हाथों को भी सेनेटाइजर से संक्रमण मुक्त किया गया और जिनके पास मास्क नही थे उन्हें मास्क दिए गए। सर्वप्रथम ग्राम पंचायत सेमर खापा के उपसरपंच पेशन पटेल ने कलेक्टर मंडला के इस अभिनव पहल की भूरी भूरी प्रशंसा की कार्यक्रम के दौरान ग्राम सेमरखापा के सामाजिक कार्यकर्ता पवन पटेल द्वारा भी छात्र छात्राओं को शिक्षा के क्षेत्र में सेमरखापा का नाम रोशन करने की बात कही गई ।अंत में बनिया तारा ग्राम पंचायत के सरपंच ने भी चलित प्रयोगशाला की तारीफ करते हुए समस्त शिक्षकों को साधुवाद दिया गया।चलित प्रयोगशाला को सफल बनाने के लिए हाई स्कूल सेमरखापा के समस्त स्टाफ साथ ही प्रियदर्शन पटेल शिक्षक टिकरिया ने भरपूर प्रयास किए और यही कारण है कि यह कार्यक्रम काफी प्रेरणादायक और सफल रहा।प्राचार्य द्वारा कुछ दिन पूर्व से ही सरपंच सचिव से संपर्क साधकर व्यवस्था बनवाई गई थी।गॉव में मुनादी करवाई गई थी।अलग अलग पंचायतों के रहवासी विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए टीम गठित की गई थी।सेमरखापा के लिए गीता चौकसे और कवींद्र सुरेश्वर,टिकरिया के लिए प्रभात मिश्रा, अनुसुइया मार्को और प्रियदर्शन पटेल,ग्राम पंचायत बनियातारा के लिए एहतेशाम नूर और कमलेश हरदहा।प्रायोगिक कार्य की नियमितता के लिए अलग अलग समूह में स्कूल आकर प्रायोगिक कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया।



