अध्यात्म/धर्म दर्पण
सुविचार
समरथ कहूँ नहि दोषु गोसाई।
रवि पावक सुरसरि की नाईं।।
अर्थात्- सूर्य अच्छा बुरा कोई भी रस सोख लेते है,
अग्नि पवित्र, अपवित्र कोई भी वस्तु जला देती है और गंगा जी शुद्ध अशुद्ध किसी भी जल को अपने मे समा कर पवित्र कर देती हैं। समर्थवान व्यक्ति को कुछ दोष नही लगता।



