प्रदेशबॉलीवुड दर्पणमहाराष्ट्र

फिल्म पीआरओ पाठक जी का निधन

मुम्बई से शामी एम् इरफ़ान की रिपोर्ट.

राजाराम पाठक जो एंटरटेनमेंट की दुनिया से जुड़े फ़िल्मी पत्रकारों के लिए आर आर पाठक या पाठक जी हुआ करते थे. अब वे हमारे बीच नहीं रहे. उन्होंने शनिवार,18 जुलाई को मुम्बई में अपने निवास स्थान पर अंतिम सांस ली. उम्र से संबंधित समस्याओं के कारण उनका निधन हो गया. वह अपने अस्सी के दशक में थे. पाठक जी अस्थमा से पीड़ित थे और काफी लंबे समय से अपने स्वास्थ्य की ठीक से देखभाल नहीं कर रहे थे. अपने एकाकी जीवन में एक तरह से स्वस्थ के प्रति लापरवाह थे. वह अपने बेटे, राहुल पाठक, अभिनेत्री बहू और एक पोते के साथ जिंदगी के दिन गुजार रहे थे फिल्मों के प्रचारक के तौर पर मीडिया से रिश्ते बनाने और बनाए रखने वालों की दुनिया का आज का माहौल शायद ये ना माने कि सत्तर, अस्सी व नब्बे के दशक में सक्रिय रहे पाठक साहब एहसास कराते थे कि, आपसी रिश्ते किसी भी काम से ज़्यादा मायने रखते हैं. उन्होंने कभी हिन्दी, अंग्रेजी, मराठी, गुजराती और जूनियर-सीनियर पत्रकार का भेदभाव नहीं किया. सभी को बराबर मान-सम्मान दिया करते थे. अपनी पत्नी के निधन के पश्चात् प्रचार – प्रसार के कार्यों में अकेले पड़ गये थे और उनकी सक्रियता कम हो गयी थी. हालांकि वह सुश्री नीलम गुप्ता के साथ “एन आर टू” नाम से पी आर के कामों में अपनी भागीदारी बरकरार रखे हुए थे. फिर भी आज के दौर में उनके पास प्रचार कार्य न के बराबर था. युवा अवस्था में पाठक जी उत्तर प्रदेश के वाराणसी से बम्बई (उस समय आज की मुम्बई बाॅम्बे या बम्बई ही कही जाती थी)  आए थे, क्योंकि वह फिल्मों के शौकीन थे और फिल्मी पत्र-पत्रिकाओं के संपादकों को पत्र लिखते रहते थे और कुछ लेख भी लिखते थे, जो फिल्म पत्रिकाओं में प्रकाशित होते थे. बताते हैं कि, सन् 1960 के दशक में फिल्म उद्योग के जाने-माने फ़ोटोग्राफ़र धीरेंद्र किशन ने शुरुआती दिनों में पाठक जी की मदद की. उस समय के नामचीन फिल्म पत्रकार सुरूर लखनवी और जेड ए जौहर ने भी पाठक जी को फिल्म नगरी की धरती पर अपना घर और पीआर के कारोबार में अहम मुकाम बनाने के लिए बहुत बड़ी मदद की. गोपाल श्रीवास्तव, जो खुद एक स्थापित फिल्म प्रचारक थे, उन्होंने पाठक जी की बहुत मदद की. पाठक जी छोटी कम बजट की फिल्में बतौर पी आर ओ करते थे. जब गोपाल श्रीवास्तव शहर से बाहर जाते थे, तब उनके सहयोगी के रूप में पाठक जी उनका कार्य संभाला करते थे. गोपाल जी ने ही पाठक जी को निर्माता-निर्देशक अर्जुन हिंगोरानी से मिलवाया था. फिल्मकार अर्जुन हिंगोरानी ने पाठक जी को अपनी फिल्म “कब कहाँ और क्योंं” का प्रचार की जिम्मेदारी दी. इस फिल्म ने पाठक जी को बड़े पीआरओ के रूप में पहचान दी. जिसके बाद बतौर प्रचारक उनके पास खूब काम आया और वह अपना काम मेहनत, लगन व ईमानदारी से करते रहे. अपने समय में फिल्म पी आर ओ में नम्बर वन भी रहे. उन्होंने छोटे बजट की कुछ फिल्मों का भी प्रचार कार्य किया. उनके काम में पैसा कभी रुकावट नहीं बना. जब वो शीर्ष पर थे, बहुत से निर्माता-निर्देशकों, कलाकारों की सहायता की. वो बहुत ही दरिया दिल इंसान थे. आपको बता दें कि, पाठक जी ने आमिर खान की पहली फ़िल्म “क़यामत से क़यामत तक”, ऋतिक रोशन की पहली फ़िल्म “कहो ना… प्यार है” और अजय देवगन की पहली फ़िल्म “फूल और कांटे” के पीआरओ थे. उन्होंने के बापैया और अन्य फिल्म निर्माताओं द्वारा निर्देशित कई दक्षिण भारतीय फिल्मों के प्रचार कार्य को भी संभाला है. कुल मिलाकर, वह लगभग 50 वर्षों के करियर में 300 से अधिक फिल्मों के अधिकारिक पीआरओ थे.अपने बेटे राहुल को निर्देशक के रूप में लॉन्च करने के लिए वह एक निर्माता भी बने और 2016 मेंं “तू बोल्ड मी कोल्ड” नामक मराठी फिल्म का निर्माण किया. इस फिल्म में उनकी बहू यानी राहुल की पत्नी शिल्पा की मुख्य भूमिका थी, जिसने बॉक्स-ऑफिस पर काफी धूम मचाई.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page

situs nagatop

nagatop slot

kingbet188

slot gacor

SUKAWIN88