मध्य प्रदेशरीवा दर्पण

सच्चाई बेपर्दा होने की आहट से बरगलाए बीएम ओ, देने लगे सफाई

सप्ताह में दो- तीन दिन आते हैं साहब, कहां जाएं शिकायत कर्ता

रीवा। स्वास्थ्य विभाग में ऐसे अधिकारियों की बहुतायत है जो दीमक की तरह विभाग की साख को खोखला करने में लगे हुए हैं। मुख्यालय छोड़ कर अपने आशियानों से सरकारी नौकरी बजाने वाले बेलगाम स्वास्थ्य अधिकारियों के कारण ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा के अनुरूप सरकारी अस्पतालों में समुचित और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं परेशान और गरीब जनता को नहीं मिल पाती हैं। जब भी किसी महत्वपूर्ण विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी खुद खानापूर्ति निपटाने की मंशा के साथ अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने लगता है तो दूरस्थ इलाकों में विभाग की व्यवस्थाओं का जनाजा निकल जाता है। स्वास्थ्य विभाग में मझगवां अस्पताल के बीएम ओ तरुणकांत त्रिपाठी भी उन बेलगाम अधिकारियों में शामिल हैं जो कभी मुख्यालय में रहकर दायित्वों का निर्वहन करना आवश्यक नहीं समझते। बीएम ओ साहब का मैनेजमेंट इतना मजबूत है कि साल 2010-11 से उनकी पदस्थापना तमाम तरह की अव्यवस्थाओं के बाद भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझगवां में बराबर बनी हुई है। जब सोशल मीडिया पर मझगवां बीएम ओ तरुणकांत त्रिपाठी की हकीकत उजागर होने का दौर शुरू हुआ तो उन्हें अपनी जिम्मेदारी याद आने लगी। सप्ताह में केवल दो से तीन दिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझगवां में दर्शन देने वाले बीएम ओ
साहब ने सोशल मीडिया में अपनी कुंडली खुलती हुई देखकर अपने सबसे करीबी लोकल तथाकथित मीडिया एजेंट के माध्यम से अपने बचाव के लिए एक वीडियो वायरल करवाया है। यह वही तथाकथित मीडिया एजेंट सौदागर है जो बीएम ओ साहब के न रहने पर स्वयं मझगवां अस्पताल का सुप्रीटेंडेंट बनकर व्यवस्थाएं देखने लगता है। मझगवां अस्पताल में भर्ती मरीजों ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती बताई तो बीएम ओ तरुणकांत त्रिपाठी सहम गए और तत्काल उन्होंने अपने करीबी तथाकथित मीडिया एजेंट के साथ मिलकर अपनी ईमानदारी वाला एक वीडियो वायरल करवा दिया। अपनी हकीकत और सरकारी अस्पताल मझगवां की बदहाली पर पर्दा डालने के लिए तथाकथित मीडिया एजेंट के परामर्श पर लापरवाह बीएम ओ तरुणकांत त्रिपाठी ने एक सुनियोजित कहानी गढ़ डाली। इस कहानी में खुद मुंह पर मास्क लगाकर मझगवां बीएम ओ अपनी ईमानदारी बताते हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने शातिराना अंदाज में सोशल मीडिया पर उनकी
खुल रही पोल को पैसों के लेन-देन से जोड़ दिया। अपने वायरल वीडियो में बीएम ओ कह रहे हैं कि 15 अगस्त में विज्ञापन के लिए कुछ मीडिया वालों ने उनसे संपर्क किया था जिस पर उन्होंने विज्ञापन देने से साफ इंकार कर दिया, बस इसी वजह से सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ सरासर झूठ को फैलाने का काम किया जा रहा है। मझगवां अस्पताल में बीएम ओ साहब की मौजूदगी सप्ताह में कितने दिन रहती है यह अस्पताल में काम करने वालों के साथ साथ अस्पताल के बाहर चाय पान का ठेला चलाने वाले तक अच्छी तरह जानते हैं। अपने तथाकथित लोकल मीडिया एजेंट के सहारे सरकारी अस्पताल को चलाने वाले बेलगाम अधिकारी यदि इतने ही ईमानदार और जिम्मेदार होते तो मध्यप्रदेश शासन के आदेश पर बकायदा मुख्यालय मझगवां में रहकर दूर दराज से आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की तमाम सुविधाओं का लाभ दिला रहे होते। अपनी कारगुजारियां सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ही मझगवां बीएम ओ तरुणकांत
त्रिपाठी ने अपने बचाव के लिए तथाकथित मीडिया एजेंट के माध्यम से एक सुनियोजित और प्रायोजित कहानी वीडियो में तैयार कर सोशल मीडिया में वायरल करवाया है।

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