खास खबरमध्य प्रदेशसाहित्य दर्पण

अधरों में हैं मचल गूँजते जब अतीत के गीत

नयनों में जब नर्तन करता,बीता हुआ अतीत।तब अधरों में मचल गूँजते,भूले-विसरे गीत। 
एक-एक सुख-दृश्य मनोरम उभर-उभर हैं आते-ना जाने कब कहाँ खो गये बे दिन बे मनमीत।स्मृतियों की बाढ़ मुझे जब बहा वहाँ ले जाती है।जहाँ महकते सपने प्यारे तरुणाई मुस्काती है।बैठ शांत मन खो जाता है धुँधली सी परछाईं में-वैरागी नयनों में पावस मचल-मचल क्यों जाती है।
नयन झरोखों से उजली सी मोहक छवि ने आकर।उर आँगन में नव्य रूप की नव आभा बिखरा कर।जीवन को कर दिया प्रकाशित सुख सौभाग्य दिया-मौन मुखर अभिव्यक्ति कुशलता प्रकट हुई मुस्काकर।

श्याम सुन्दर श्रीवास्तव ‘कोमल’                         
व्याख्याता-हिन्दी                 
अशोक उ०मा०विद्यालय,                     
लहार,भिण्ड,म०प्र०

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page

situs nagatop

nagatop slot

kingbet188

slot gacor

SUKAWIN88