मध्य प्रदेशसतना दर्पण

खनिज संपदा बचाने के लिए जरुरी है अब महाभियान

कलेक्टर्स पर उम्मीदों का भार, शासन को मिलेगी राहत

सतना। विंध्य प्रदेश के जिलों में तेजी के साथ खनिज संपदाओं का दोहन किया जा रहा है। समय के साथ मध्य प्रदेश शासन को आर्थिक रूप से कमजोर करने के मामले में यह समस्या सबसे असरकारक भूमिका निभा रही है। केवल राजस्व अधिकारियों की बैठकों में दिशा निर्देश की घुट्टी पिला देने से सुधार की गुंजाइश करना सरासर बेमानी है। अवैध उत्खनन के माध्यम से रीवा, सतना, सीधी जिलों में खनिज संपदाओं की लूट खसोट को रोकना आज शासन- प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। अब केवल कलेक्टर्स ही वह आखिरी उम्मीद नजर आते हैं, जिनके सहारे खनिज संपदाओं के दोहन पर नकेल कसते हुए खनिज संपदा को बचाने का बड़ा काम किया जा सकता है। खनिज संपदा के लूट खसोट वाले हालातों पर नियंत्रण की अंतिम उम्मीद केवल कलेक्टर्स ही हैं। अवैध उत्खनन के सहारे जहां एक तरफ बेशकीमती खनिज संपदा का डंके की चोट पर निरंतर दोहन किया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश शासन को करोड़ों रुपए के राजस्व का लगातार चूना लगाया जा रहा है। अब केवल जिलों के कलेकटर्स ही खनिज संपदा के लूट खसोट के मामले में किसी तरह का बदलाव ला सकते हैं। रीवा, सतना, सीधी जिले के कलेक्टर्स के लिए खनिज संपदाओं को बचाने बावत महाभियान चलाना वक्त की आवाज है।

हल्का पटवारियों से ही मिलेंगे जिले के चिंहित स्थल
लेटेराईट जैसी अमूल्य खनिज संपदा की लूट खसोट प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी बन गई है। राजस्व विभाग की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हल्का पटवारी होते हैं। इन्हें बखूबी शासन और वन विभाग की जमीनों पर स्वीकृत खनिज लीज की जानकारी रहती है। जिलों के कलेकटर्स सभी हल्का पटवारियों को तलब करते हुए खदान के मामले में चिंहित स्थलों की संपूर्ण जानकारी हासिल करें। विंध्य प्रदेश के सतना, रीवा, सीधी जिलों में शासन की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कलेक्टर्स का सचेत रहना बेहद जरूरी है। पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कलेक्टर्स अपने जिलों में महाभियान चलाएं, जिससे बदलाव की तस्वीर वास्तविक रूप में सामने आ सके। किसी भी जिले में खनिज संपदाओं का दोहन किन किन चिंहित स्थलों पर किया जा रहा है, इसकी वास्तविक जानकारी केवल हल्का पटवारी ही उपलब्ध करवा सकते हैं। अब देखना यह है कि सतना कलेक्टर अजय कटेसरिया जिले की खनिज संपदाओं को बचाने के लिए कब तक महाभियान हेतु नजरें इनायत फरमा पाते हैं।

पहुंच मार्ग अवरुद्ध किए जाने की शीघ्र आवश्यकता
प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि समय के साथ संपूर्ण मध्यप्रदेश की तरह हमारे विंध्य प्रदेश में भी खनिज संपदाओं की धड़ल्ले से चोरी बहुत बड़ी समस्या बन गई है। संबंधित जिलों में हल्का पटवारियों से स्वीकृत चिंहित स्थलों की लिस्ट हासिल करते हुए खदान तक पहुंचने वाले रास्ते को अवरूद्ध किए जाने से ही हम खनिज संपदा की लूट खसोट को रोकने में कामयाब हो सकते हैं। लेटेराईट सहित अन्य खनिज संपदाओं के चिंहित स्थलों तक पहुंचने वाले रास्तों पर खाईनुमा जानलेवा गड्ढों का निर्माण कराए जाने से लोडिंग वाले वाहनों की आवाजाही असंभव जैसी हो जाएगी। जिससे लूट खसोट के कारोबार पर नकेल कसने लगेगी। बुद्धजीवियों का मानना है कि कलेक्टर्स हल्का पटवारियों से मिलने वाली चिंहित स्थलों लिस्ट के अनुसार खदान पहुंच मार्ग पर जानलेवा गड्ढों का निर्माण करवा दे तो बड़े लोडर वाहनों की पहुंच खदान तक संभव नहीं हो पाएगी। चिह्नित खदानों तक पहुंचने वाले रास्तों को शीघ्र अवरुद्ध किए जाने की आवश्यकता है।

अकेले विटमा खदान से शासन को 30 करोड़ का झटका
लीज आवंटन की सरकारी प्रकिया को अंजाम देते हुए प्रशासन के दरवाजे से स्वीकृत हासिल कर ली जाती है। लीज स्वीकृत देते समय उस कुल क्षेत्र का उल्लेख भी किया जाता है जहां पर खनन करना है। इसके बाद भी बहुतायत चिंहित स्थलों पर अनुमति प्राप्त वाले क्षेत्र से कहीं ज्यादा हिस्से में अवैध उत्खनन को डंके की चोट पर अंजाम दिया जाता है। सतना जिले की बिरसिंहपुर तहसील अंतर्गत ग्राम विटमा की खदान को तत्कालीन कलेक्टर ने 19/05/2015 को आदेश जारी करते हुए स्वीकृत प्रदान की थी। कलेक्टर न्यायालय के इस जारी आदेश में स्पष्ट रुप से उल्लेख किया गया था कि आस्था के केंद्र सिद्ध बाबा के चबूतरे से 100 मीटर की दूरी तक ही खनन किया जाए। लीज हासिल करने वाले खनन माफिया ने सुनियोजित तरीके से पानी फेरते हुए अनुमति से बहुत ज्यादा हिस्से पर खुदाई करवाते हैं। लेटेराईट की चोरी, उस पर भी सीनाजोरी जैसे हालात निर्मित हो गये हैं। सतना जिले की एकमात्र विटमा खदान में डंके की चोट पर अवैध उत्खनन कराते हुए खनन माफिया ने मध्य प्रदेश शासन को अब तक लगभग 30 करोड़ रुपए के राजस्व का चूना लगाया है। ऐसे अनगिनत मामले विंध्य प्रदेश के जिलों में तहसील स्तर पर नजर आते हैं। चिंहित खदानों तक पहुंचने वाले रास्तों को अवरुद्ध किए जाने के बाद ही काफी हद तक हालात नियंत्रण में नजर आ सकते हैं?

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