भोपाल दर्पणमध्य प्रदेश

एक वर्ष में 23 विभागों में हुई 40 करोड़ की चोरियां

कैग रिपोर्ट से हुआ खुलासा – नागरिक उपभोक्ता मंच
पवन कौरव भोपाल। भारत के महालेखाकार परीक्षक (कैग) द्वारा जारी नवीनतम रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ की मध्यप्रदेश शासन के विभिन्न विभागों में वर्ष 2017 मार्च से लेकर वर्ष 2018 मार्च के मध्य करोड़ों रुपयों की चोरियां की गई है । जिसमे रुपयों के साथ साथ वस्तुओं की चोरियां भी शामिल है । नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर विशेष जांच एजेंसी द्वारा समस्त चोरियां की जांच करने की मांग की है । कैग द्वारा अपनी ऑडिट रिपोर्ट स्टेट फाइनेंस ऑडिट रिपोर्ट फ़ॉर ईयर 31 मार्च 2018 शीर्षक से नवंबर 2019 में जारी की ।

कैग रिपोर्ट से हुआ खुलासा

प्रांतीय संयोजक मनीष शर्मा ने बताया कि कैग की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश सरकार के 23 विभागों में 1 वर्ष की अवधि के दौरान 38 करोड़ 29 लाख 66 हजार रुपए की चोरियां हुई, विवरण इस प्रकार है -: वन एवं वन्य जीव विभाग -:  2736 मामले 16 करोड़ 03 लाख 55 हजार की चोरी , सामान्य शिक्षा विभाग 103 मामले 07 करोड़ 13 लाख की चोरी , ट्रेजरी एंड अकाउंट विभाग -: 11 मामले 8 करोड़ 30 लाख की चोरी , पुलिस विभाग -: 309 मामले 02 करोड़ 80 लाख की चोरी , न्याय व्यवस्था विभाग -: 05 मामले 14 लाख 19 हजार की चोरी , चुनाव विभाग -: दो मामले 11 लाख 67 हजार की चोरी , तकनीकी शिक्षा विभाग -: 17 मामले 55 लाख 62 हजार की चोरी , खेल तथा युवा विभाग -: तीन मामले 4 लाख 20000 हजार की चोरी , मेडिकल एवं पब्लिक हेल्थ विभाग -: 14 मामले 60 लाख 94 हजार की चोरी , वाटर सप्लाई विभाग -: 05 मामले चार लाख 91 हजार की चोरी , एससी/एसटी विभाग -: 06 मामले 8 लाख 32000 हजार की चोरी , लेबर एंड एंप्लॉयमेंट विभाग -: 13 मामले 16 लाख 90 हजार की चोरी , महिला एवं बाल विकास विभाग -: सात मामले 16 लाख 90 हजार की चोरी , कृषि विभाग -: 28 मामले 74 लाख 10 हजार की चोरी , एनिमल हस्वेडरी  विभाग -: 20 मामले 19 लाख सात हजार की चोरी , ग्रामीण विकास विभाग -: चार मामले 46 लाख 55 हजार की चोरी , खनन विभाग -: तीन मामले चार लाख 22 हजार की चोरी आदि विभाग सम्मिलित है ।

मिलीभगत की संभावना

उपभोक्ता मंच के डॉ. राकेश चक्रवर्ती ,  प्रफुल सक्सेना , विनोद पांडे , गिरेंद्र कपूर , आदि सदस्यों ने बताया कि उपरोक्त मामलों में सर्वाधिक चोरियां वन एवं वन्य जीव व सामान्य शिक्षा विभाग , पुलिस विभाग ट्रेजरी विभाग आदि में की गई है जिसमें धन के साथ बच्चों की चोरी भी शामिल है इतनी बड़ी संख्या में विभागों से चोरी बिना अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मिलीभगत के संभव नहीं है । सरकार को समस्त मामलों की जांच तत्काल उच्च स्तरीय जांच एजेंसी से करवानी चाहिए ।

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