आवोहवा में जहर घोल रहे हैं 500 से अधिक स्टोन क्रेशर

लोगों की जिंदगी से खिलवाड़, खनिज-पर्यावरण का खेल
रीवा दर्पण। पैसों की हवस इंसानियत के लिए सबसे बड़ी दुश्मन बन गई है। सरकारी ओहदों में बैठने वाले जिम्मेदारों को अधिक से अधिक ऊपरी पैसों की भूख बनी रहती है, इसलिए वे कागजों में ईमानदारी दिखाते हुए प्रायोजित बेईमानी को अंजाम देने के आदी हो जाते हैं। यह तरीका अपनाने से सबका भला अपने आप होने लगता है। कुछ इसी ढंग पर सरकारी व्यवस्था काम करने लगी है। यही वजह है कि ग्रामीण परिवेश में रहने वाले लोगों की जिंदगी पर बीमारी का महासंकट बना रहता है। रीवा जिले के बैजनाथ बेला से लेकर छिजवार तक लगभग बीस किलोमीटर में पांच सौ से अधिक स्टोन क्रेशर्स के संचालन की अनुमति देकर जिला खनिज विभाग और पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जानबूझकर सैकड़ों ग्रामीणों की बेशकीमती जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया है। केवल बीस किलोमीटर की दूरी में पांच सौ से अधिक स्टोन क्रेशर्स का संचालन वास्तव में बहुत बड़ी लापरवाही को जाहिर करता है। चौबीस घंटे स्टोन क्रेशर पर काम होने की वजह से डस्ट रुपी धूल का गुबार ही हमेशा नजर आता है। जिला खनिज विभाग और पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ऊपरी कमाई करने के लिए बेकसूर ग्रामीणों का जीवन दांव पर लगा दिया है। बीस किलोमीटर क्षेत्र की आवोहवा में अत्यधिक खतरनाक प्रदूषण समाहित हो गया है। जिसके कारण घर घर में सांस संबंधी रोग के मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। सूत्रों ने बताया कि बैजनाथ बेला से छिजवार के बीच और नये स्टोन क्रेशर खोलने का प्रयास किया जा रहा है।
चौबीस घंटे छाया रहता है आसमान पर डस्ट का गुबार
रीवा जिले का प्रशासन पर्यावरण की शुद्धता कायम रखने के लिए कुछ नहीं करता है। केवल कागजों में वृक्षारोपण जैसे जुमलों को हमेशा हाईलाइट रखा जाता है। बैजनाथ से छिजवार के मध्य पांच सौ से अधिक स्टोन क्रेशर्स के संचालन की अनुमति देने वाले प्रशासन ने ग्रामीणों को मौत के कुएं में धकेल दिया है। चौबीस घंटे स्टोन क्रेशर में मशीनों के चलने की वजह से बीस किलोमीटर के एरिया में रहने वाले लोगों के बीच सांस संबंधी बीमारी का निरंतर इजाफा हो रहा है। सांस लेने में लोगों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है।
शिकवा शिकायतों का यहां पर कोई असर नहीं?
रीवा जिले की सीमा में आने वाले बैजनाथ से छिजवार पहुंच मार्ग पर सबसे अधिक वायु प्रदूषण मौजूद रहता है। पांच सौ से अधिक स्टोन क्रेशर के संचालन को जिला खनिज विभाग और पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का परस्पर संरक्षण मिलने की वजह से बीस किलोमीटर की आवोहवा में डस्ट रुपी जहर घुल गया है। स्थानीय लोगों ने जानलेवा प्रदूषण से अपने जीवन को बचाने के लिए सक्षम अफसरों तक शिकवा शिकायतों को जरुर पहुंचाया पर किसी भी बेलगाम स्टोन क्रेशर के मालिकान पर किसी तरह की प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई है। मध्यप्रदेश शासन को गुमराह करते हुए जिला खनिज विभाग और पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सैकड़ों लोगों की कीमती जिंदगी दांव पर लगा दी है। बीस किलोमीटर में चलने वाली स्टोन क्रेशर्स का दबदबा बराबर चढोत्री व्यवस्था फालो करना नहीं भूलते हैं।
केवल जनहित के खोखले दावे करते हैं जनप्रतिनिधि?
मध्य प्रदेश में विंध्य प्रदेश की सियासत को हमेशा वजनदार माना गया है। इसके बाद भी वास्तविक जनहित को लेकर कभी जनप्रतिनिधियों को सक्रिय राजनीति को करते नहीं देखा गया है। भाजपा, कांग्रेस, बसपा, सपा सहित अन्य राजनैतिक और सामाजिक संगठनों की भरमार रीवा जिले में रहने के बाद भी किसी ने लोगों की जिंदगी के लिए काल बन चुके स्टोन क्रेशर्स पर कार्रवाई करने के लिए आवाज तक नहीं उठाई। रीवा जिले की धरती पर पैदा होने वाला हर राजनीतिज्ञ बैजनाथ बेला से छिजवार पहुंच मार्ग की वास्तविकता से मुंह नहीं फेर सकता? आज तक किसी भी राजनैतिक, सामाजिक संगठनों को सैकड़ों लोगों का जीवन बचाने के लिए संभागायुक्त अथवा कलेक्टर को एक ज्ञापन पत्र सौंपते नहीं देखा गया? रीवा जिले के समस्त जनप्रतिनिधि जनहित को लेकर केवल खोखले दावे करने तक सीमित रहते हैं। जब जिम्मेवार सांसद, विधायक, मंत्री ही जनहित को कागजी खिलवाड़ बना चुके हैं तो फिर प्रशासनिक अमले को कौन कुंभकर्णी नींद से जगाने में कामयाब होगा? जिला खनिज विभाग, पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उदासीन जिला प्रशासन के संरक्षण में बीस किलोमीटर एरिया सहित पूरे रीवा जिले में बहुसंख्य फर्जी स्टोन क्रेशर्स डंके की चोट पर संचालित हो रहे हैं।



