जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

अपने रास्ते के लिए संघर्षरत हैं अन्नदाता


नकारात्मक है क्राइस्ट चर्च स्कूल प्रबंधन और प्रशासन का रवैया

जबलपुर। एक और सरकार किसानों को तरह-तरह की सुविधाएं दे रही है। वहीं दूसरी तरफ किसानों की वास्तविक समस्याओं पर अधिकारी कान नहीं धरते। बीते कई वर्षों से गौर साली वाड़ा के किसान अपने उस रास्ते के लिए संघर्षरत हैं। जिसका इस्तेमाल वो और उनके माता-पिता सदियों से करते आए हैं। विगत 6 वर्ष पूर्व क्राइस्ट चर्च स्कूल प्रबंधन ने अपनी नई शाखा गौर सालीवाडा के निकट खुली और उस स्कूल की बिल्डिंग खड़ी की लेकिन इस दौरान किसान जिस रास्ते का इस्तेमाल कर रहे थे। सीमांकन के दौरान वह रास्ता भी क्राइस्ट चर्च स्कूल प्रबंधन के अधिकार क्षेत्र में आ गया। उसके बाद ही क्राइस्ट चर्च स्कूल ने जमीन की रजिस्ट्री कराई और स्कूल की बिल्डिंग खड़ी की।
आपत्ति कर्ता और पीड़ित किसानों की तरफ से बोलते हुए नरेश कुशवाहा ने मीडिया को बताया कि ग्रामीणों ने इस सीमांकन को अदालत में चुनौती दी। इस सीमांकन पर अदालत ने भी सवाल उठाए। वर्तमान में लोकायुक्त की जांच जारी है। वर्तमान परिस्थितियों में राजस्व अधिकारियों का रवैया संदेहास्पद इसलिए बन जाता है। क्योंकि ग्रामीणों के अनुसार कल शाम उन्हें, बिना कोई औपचारिक सूचना दिए राजस्व विभाग की टीम चिन्हाकन करके गई और चूने से लाइन खींच कर चली गई। जिस पर क्राइस्ट चर्च स्कूल प्रबंधन ने शाम से ही दीवार उठाने का काम शुरू कर दिया। ग्रामीणों को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने इसका विरोध किया। इसके बाद विवाद की स्थिति निर्मित हुई। हालांकि इस विवाद के दौरान क्राइस्ट चर्च स्कूल की तरफ से यह बात भी कही गई कि यदि सीमांकन गलत होता है। और इस तरह का आदेश अधिकारियों की तरफ से आता है। तो उसे देखने के बाद, वो स्वयं बनाई जा रही इस दीवार को, तोड़ देंगे।
गांव के सरपंच ने इस बात की सूचना क्षेत्र के एसडीएम नमः शिवाय अरझरिया को दी तब उन्होंने प्रबंधन को दीवार का काम रोक देने के लिए मौखिक रूप से निर्देशित किया और अगली तारीख पर मामले की उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
एसडीम महोदय के इस आश्वासन के बाद एक और ग्रामीण भी शांत हो गए और स्कूल प्रबंधन के कर्मचारी भी कार्य रोक कर बैठ गए। हालांकि इस रास्ते को लेकर समय-समय पर ग्रामीणों और स्कूल प्रबंधन के बीच टकराव की स्थिति निर्मित होती रहती है। इसके पहले की कोई अप्रिय घटना घटे, अगर प्रशासन समय रहते इस मामले का नियमानुसार उचित रीति से निपटारा कर देता है। तो इसे एक सुखद अंत कहा जाएगा।

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