लाल आतंक के कब्जे में कान्हा नेशनल पार्क

नक्सलियों को नियंत्रित क्यों नहीं कर पा रही सरकार, कब समाप्त होगी समस्या
मंडला। लाल आतंक का असर मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य जिले मंडला में कान्हा नेशनल पार्क में भी होने लगा है। मंडला जिला नक्सल प्रभावित जिला माना जाता है। नक्सलियों की गतिविधियां इस जिले में काफी लम्बे समय से चल रही है। विश्व प्रसिद्ध कान्हा नेशनल पार्क भी धीरे-धीरे नक्सलियो की गिरफ्त में आते जा रहा है जो अब सभी के लिए चिन्ता का विषय बन गया है। सभी जानते हैं कि कान्हा नेशनल पार्क में वन्यप्राणियों को देखने के लिए देशी पर्यटकों के अलावा विदेशी पर्यटक भी काफी संख्या में आते हैं। प्रकृति ने इस पार्क को खूब नवाजा है सुंदर वन और वन्यप्राणी यहां देखने लायक हैं जिसकी चहुंओर चर्चा भी होती है किंतु अब चिंता का विषय यह हो गया है कि इस पार्क में भी लाल आतंक पनप रहा है जिससे पर्यटकों को भय सता रहा है। ज्ञात हो कि कान्हा नेशनल पार्क मंडला-बालाघाट जिले में स्थित है यह सभी को भी ज्ञात है कि बालाघाट जिला मंडला जिले की अपेक्षा नक्सली गतिविधियों के लिए ज्यादा चर्चित है। नक्सलियों की गतिविधि बालाघाट के बाद मंडला जिले में भी संचालित हो रही है। नक्सली बालाघाट जिले में चौकियों से राशन लूट रहे हैं। कान्हा नेशनल पार्क के कोर जोन व बफर जोन में घने जंगल का फायदा उठाकर लाल आतंक फैला रहे हैं। पार्क के अंदर व आसपास बनी वन चौकियों में पहुंचकर राशन सामग्री लूटकर एकत्रित कर रहे हैं। नक्सली छत्तीसगढ़ की सीमावर्ती क्षेत्र से सूबखार के रास्ते कान्हा नेशनल पार्क में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। सूबखार के रास्ते से मंडला से डिण्डौरी जिले तक अपनी पैठ बढ़ा रहे हैं। नक्सलियों की इस बढ़ती तादाद से कान्हा नेशनल पार्क प्रबंधन भी परेशान है। पार्क में पर्यटकों के साथ वन्य प्राणियों पर भी खतरा यहां मंडरा रहा है। कान्हा नेशनल पार्क के कोर व बफर एरिया में वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए बनाई गई वन चौकियों में नाकेदार व सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। नक्सली इन्हें धमका रहे हैं और राशन लूटकर ले जा रहे हैं और जान से मारने की धमकी भी दे रहे हैं। ज्ञात हो कि सितम्बर में पुलिस ने राष्ट्रीय पार्क कान्हा से लगे हुए समनापुर बाघाटोला में नक्सली बादल को जिंदा गिरफ्तार किया था, वहीं नवम्बर में बैहर थाना अन्तर्गत कान्हा नेशनल पार्क से लगे मालखेड़ी में पुलिस मुठभेड़ के दौरान एक महिला नक्सली शारदा को मार गिराया था। जिले में कई बार नक्सलियों के आने जाने की चर्चा होती रहती है। शासन प्रशासन द्वारा नक्सलियों को नियंत्रित करने के लिए आखिर क्या प्रयास किये जा रहे हैं यह जांच का विषय हो गया है। इन्हें नियंत्रित करने के नाम पर अब तक कौन-कौन से प्रयास किये गये, कितना धन खर्च किया गया और कितनी सफलता प्राप्त हुई यह जांच का विषय हो जाने के बाद भी शासन प्रशासन के जवाबदार बेहोशी का परिचय दे रहे हैं। यही वजह है कि नक्सली निरंतर अपनी गतिविधियों को तेज कर रहे हैं, बालाघाट के बाद मंडला और डिण्डौरी जिले में तेजी के साथ विस्तार कर रहे हैं। कान्हा नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर के अनुसार पुलिस मुख्यालय भोपाल को पत्र लिखकर इस बात की जानकारी दी गई है कि नक्सलियों की आमद कान्हा नेशनल पार्क व उसके आसपास के जंगलों में दिखाई दे रही है। नक्सली जो कुछ भी कर रहे हैं उसकी सूचना दे दी गई है। सवाल यह है कि सूचना देने के बाद शासन प्रशासन द्वारा अब तक क्या किया गया इस सम्बंध में कोई फीड बैक नहीं लिया जा रहा है। एक तरफ कान्हा नेशनल पार्क में वन्य प्राणी सुरक्षित नहीं हैं तो दूसरी तरफ नक्सली बेहद महत्वपूर्ण पार्क को अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित अड्डा बनाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं और उनके प्रयासों पर कोई पानी फेरने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है। नागरिक सवाल कर रहे हैं कि नक्सलियों की आखिर लड़ाई किस बात की है आखिर ये क्यों जंगल में अपना जीवन गुजार कर बंदूक की नोक पर लूट खसोट एवं मारकाट कर रहे हैं। क्या सरकार नक्सलियों को जड़मूल से समाप्त करने के लिए या आत्म समर्पण करने के लिए लगातार प्रयास नहीं कर रही है। काफी समय से देश के अंदर ही सरेआम नक्सली भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी में भी अपने करतूतों को अंजाम दे रहे हैं और शासन प्रशासन का सुरक्षा अमला मूक दर्शक बनकर तमाशा देख रहा है। जनापेक्षा है नक्सली समस्या का पूर्ण रूप से समाधान किया जावे और नागरिकों को नक्सलियों के भय से मुक्त किया जावे।



