मण्डला दर्पणमध्य प्रदेश

खनिज माफियाओं की जेब में कैद सरकार, सरेआम हो रही प्रकृति के अनमोल खजाने की लूट

मंडला। म.प्र. के आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में प्रकृति के अनमोल खजाने की लूट हो रही है। शासन-प्रशासन के संरक्षण में खनिज सम्पदा लूटी जा रही है। जिसकी वजह से जिले के नागरिकों में लगातार आक्रोश पनपता जा रहा है। रेत चारों की इस जिले में बल्ले-बल्ले हो रही है। सरेआम रेत चोरी का कारोबार चल रहा है इसके अलावा अवैध तरीके से सम्पूर्ण जिले में स्टोन क्रेशर संचालित हो रहे हैं और नियम कानून की धज्जियां उड़ाकर सिर्फ खनिज सम्पदा की लूट खसोट कर रहे हैं। तहसील नैनपुर के ग्राम परसवाड़ा, देवरी, खुर्सीपार, बंजाराटोला, गजना, खोहरी, कजरवाड़ा, चंदियामाल, चिचोली, चरगांव, सर्रा व तहसील मंडला के ग्राम सुभरिया सहित अन्य ग्रामों में क्रेशर प्लांट चल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में संचालित गिट्टी क्रेशर खदानों से धूल अनाप शनाप उड़ रही है जिससे पर्यावरण दिनो-दिन प्रदूषित होते जा रहा है वहीं उपजाऊ जमीन बंजर होते जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने नियम कानून तो इस सम्बंध में सख्त बनाये हैं लेकिन मैदानी स्तर पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। अधिकांश खदानों में न तो पानी का छिड़काव किया जा रहा है और न ही विंड बेरकिंग वाल बनाई गई है। डस्ट अरेस्टर भी कहीं नहीं लगाये गये हैं। तहसील नैनपुर अंतर्गत लगभग 25 क्रेशर खदानें हैं खदान संचालकों को संचालन अनुमति देते समय पर्यावरणीय नियम का पालन करने के लिए शपथपत्र लिया जाता है लेकिन वह सिर्फ कागज में ही सीमित होकर रह गया है। निरीक्षण इत्यादि कम किया जा रहा है प्लांटेशन की कमी सभी खदानों में दिखाई दे रही है। केन्द्रीय प्रदूषण बोर्ड एवं एनजीटी के नियमों का पालन क्यों नहीं हो पा रहा है यह जांच का विषय है। यहां पर गिट्टी एवं डोलोमाइट क्रेशर प्लांटों में कहीं पर भी 15 फिट ऊंची सीमेंट कांक्रीट की दीवार एवं तीन लाइन का वृहद वृक्षारोपण नहीं किया गया है। नियम अनुसार क्रेशर को तीन ओर से विंड बेरकिंग वाल से घेरना है, बाइब्रेटिंग/ रोटरी स्कीन को एमएस/जीआई शीट से कवर्ड करना/जीरो गिट्टी के डस्ट के ट्रांसफार्मर बिंदु पर टेलीस्कोपिक सूट से कवर करना/पत्थर में क्रेशिंग के पूर्व जल छिड़काव करना/एप्रोच रोड बनाना और उसमें चार बार पानी का छिड़काव करना/वर्कर को नोज मास्क प्रदान करना सहित तमाम तरह के नियम हैं जिसका पालन मंडला जिले में नहीं किया जा रहा है। पूरे जिले में खनिज माफिया सक्रिय है लोग कह रहे हैं कि खनिज माफियाओं की जेब में सरकार कैद हो गई है। यही वजह है कि खनिज सम्पदा सुरक्षित नहीं है। खनिज माफिया अवैध उत्खनन करने से बाज नहीं आ रहे हैं ब्लास्टिंग की तेज आवाज से ग्रामीण डरे हुए हैं, जब देखो तब ब्लास्टिंग होते रहती है। दिन और रात स्टोन क्रेशर चल रहे हैं। रात भर चलने वाले स्टोन क्रेशर से नागरिकों का सोना मुश्किल हो गया है। चोरों की बारात में जनवासा कौन ताके जैसी स्थिति इस सम्बंध में यहां मंडला जिले में निर्मित हो गई है। सभी को ज्ञात है कि शासन प्रशासन के संरक्षण में खनिज सम्पदा लूटी जा रही है। नेता और नौकरशाह सभी मौन साधे बैठे हुए हैं। इसके अलावा तमाम तरह की समस्यायें भी इस जिले में मौजूद हैं। खनिज के बाद वन सम्पदा भी सुरक्षित नहीं है। जन कल्याण की योजनाओं के बेहद बुरे हाल हैं। शिक्षा स्वास्थ्य की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है। कृषि, उद्यानिकी की योजनायें कागज में चल रही है। सड़कों की हालत बेहद बदतर हो गई है। आयुष्मान भारत, उज्जवला योजना, मनरेगा जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाओं की दुर्गती हो गई है। सीएम हेल्प लाइन, जनसुनवाई एवं जन समस्या निवारण शिविर पूरी तरह फ्लॉप हो गये हैं। उद्योग व पर्यटन विकास के नाम पर सिर्फ धन फूंका जा रहा है, परिणाम कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। शिशु पालना केन्द्र को केन्द्र सरकार से काफी लम्बी राशि अनुदान की अभी तक प्रदान नहीं की गई है। ऐसी ढ़ेर सारी समस्यायें हैं जिनके निराकरण पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, लोगों का मानना है कि जब सरेआम प्रकृति की लूट की जा रही है तो इस तरह की समस्याओं का मौजूद होना और निराकरण न होना आम बात है। जनापेक्षा है खनिज माफियाओं पर अंकुश लगाकर तमाम तरह की समस्याओं का निराकरण किया जावे।

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