जवाबदारों की बेहोशी से मैली हो गई मां नर्मदा ?

नर्मदा जल में समा रहा गंदे नालों का पानी, लाखों रूपये का प्रोजेक्ट अधर में
खुले में शौचमुक्ति की खुली पोल नर्मदा किनारे कर रहे खुले आम शौच

मध्यप्रदेश सरकार नर्मदा नदी सरंकि्षत करने में अभी तक विफल रही और जिला प्रशासन नर्मदा नदी को स्वच्छ रखने में। नर्मदा नदी के किनारे में लगे हरे भरे पेड़- पौधो को काटने के साथ अवैध रेत उत्खनन जोरो पर है। एक तरफ सरकार नर्मदा नदी सरंक्षण कीे बात करती है, और दूसरी तरफ रेत उत्खन्न पर बड़ी बड़ी कंपनियों को ठेके दे रही है। जबकि नेताओं के साथ अधिकारी भी इस कार्य में सहयोग दे रहे है। नेता चाहे पक्ष का हो या विपक्ष का मां नर्मदा को पूज्यकर अपनी राजनीति चमकाते है। प्रदूषण व खनिज विभाग के अधिकारी निट्ठले साबित हो रहे है। मां नर्मदा हमारी पूज्यनीय है जिसे सब मां कहते हैं लोग उसे ही गंदा करने में पीछे नहीं हैं !

जबलपुर/मण्डला/डिण्डौरी। प्रदेश की जीवनरेखा मां नर्मदा भी सभी जवाबदारों की ठगी का शिकार होकर रह गई है। मध्यप्रदेश में सरकार चाहे किसी भी राजनैतिक दल की रही हो सभी ने मां नर्मदा के साथ विकास के नाम पर सिर्फ छल किया है। यही वजह है कि आज भी मां नर्मदा के तटों का विकास सही तरीके से लगभग सभी नर्मदा क्षेत्र में पूरा नहीं हो पाया है। मां नर्मदा अमरकंटक की पहाडिय़ों से अवतरित होकर डिंडोरी, मंडला, जबलपुर होते हुए अंतिम छोर तक सिर्फ उपेक्षित हो रही हैं। दिनों दिन प्रदूषण का ग्राफ नर्मदा के जल में गंदगी समाहित होने की वजह से बढ़ता जा रहा है। मां नर्मदा ने महिष्मति नगर मंडला को तो अपनी गोद में बसाया है। नगर को तीन तरफ से अपनी आंचल में बसाया हुआ है। यहां पर 16 गंदे नालों का पानी अनवरत समाहित हो रहा है इसके अलावा तमाम तरह की गंदगी नर्मदा के जल में जमा होती जा रही है। 16 गंदे नालों का पानी नर्मदा में समाहित न हो इसके लिए कई लाख रूपये का प्रोजेक्ट तो तैयार है लेकिन काफी समय से यह अधर में लटका हुआ है।
शर्म की बात तो यह है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत कई करोड़ों रूपये फूंक दिये गये और मां नर्मदा की गंदगी को दूर करने के लिये कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया। बेशर्म होकर नर्मदा तट के किनारे खुलेआम शौच किये जा रहे हैं। जिला मुख्यालय मंडला में ही खुले में शौच से मुक्ति के दावों की पोल खुल गई है। ज्ञात हो कि शासन द्वारा मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य जिले को खुले में शौचमुक्त होने का दावा किया जा रहा है लेकिन हकीकत सभी को ज्ञात है। आज भी इस जिले में खुलेआम शौच किया जा रहा है जो सभी के लिए चुनौती का विषय हो गया है। जब जिला मुख्यालय मंडला में नर्मदा किनारे ही लोग खुले में शौच कर रहे हैं तो जिले के अन्य क्षेत्रों में क्या स्थिति होगी अनुमान लगाया जा सकता है। मां नर्मदा के किनारे घाटों की हालत भी खस्ता है। जिला मुख्यालय मंडला में जर्जर घाटों की मरम्मत के लिये कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है और नए घाटों के निर्माण में भी घोर लापरवाही बरती जा रही है। आज भी मुन्नी बाई धर्मशाला, रंगरेज घाट मरम्मत की बाट जोह रहा है। अंदर से यह घाट खोखला हो गया है। दुर्घटना की स्थिति बनी रहती है। ऐसे कई घाट हैं जो जर्जर और खतरनाक हो गये हैं जिनकी तरफ भी कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मां नर्मदा के किनारे अनेक धार्मिक, सामाजिक, पौराणिक व पुरातत्विक महत्व के स्थल हैं जिनके विकास के लिये भी कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऋणमोचक कुंड, सहस्त्रधारा, संगमघाट सहित तमाम तरह के स्थल हैं जो नर्मदा किनारे या मध्य में स्थित हैं जिनके विकास के लिए जवाबदारों का ध्यान नहीं देना घोर लापरवाही का परिणाम ही माना जा रहा है। कई तरह की नौटंकी नर्मदा विकास के नाम पर की गई लेकिन नौटंकी तो सिर्फ नौटंकी ही रह गई विकास कहीं भी पर्याप्त नहीं हो पाया। सरकार के साथ साथ समाज की भी बेहोशी मां नर्मदा के विकास के लिए भी बनी हुई है। मां नर्मदा के तटों के विकास के लिए और प्रदूषण मुक्त करने के लिए सभी जवाबदार गहरी नींद से जागें और तेजी के साथ नर्मदा तटों के विकास के लिए विशेष ध्यान दें ऐसी जनापेक्षा है।



