जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

शिक्षा मंत्री शिक्षको को बीएलओ ड्युटी से मुक्त करने का साहस दिखायेः धर्मेन्द्र गहलोत

राजस्थान । राजस्थान शिक्षक संघ (प्रगतिशील) के प्रदेश मुख्य महामंत्री धर्मेंद्र गहलोत ने राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को ज्ञापन भेजकर बीएलओ के रूप में कार्य कर रहे शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य से मुक्त करने की मांग की।
शिक्षक संघ(प्रगतिशील)के मीडिया प्रभारी गुरुदीन वर्मा के अनुसार संघ (प्रगतिशील) के मुख्य महामंत्री धर्मेंद्र गहलोत ने ज्ञापन में बताया कि राज्य में 1 लाख से अधिक विभिन्न वर्ग के शिक्षकों के पद रिक्त होने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों के दबाव में गैर शैक्षणिक कार्य, मतदाता सूचियों के निर्माण एवं संशोधन के लिए और मतदान केंद्र प्रभारी के रूप में ही बीएलओ के रूप में शिक्षकों को नियुक्त किया जाता है लेकिन बडा दुर्भाग्य हैं कि शिक्षकों की भारी कमी के बावजूद प्रशासन शिक्षकों, वरिष्ठ अध्यापको को बीएलओ के रूप में कार्य करवाकर लाखो छात्रो के भविष्य के साथ खिलवाड किया जा रहा हैं। हर विभाग के अधिकारी इन बीएलओ को बेचारा समझकर अपने विभाग के कार्यों में अपने हाथों की कठपुतली समझकर मानसिक रूप से प्रताडित कर रहे है जो किसी भी स्थिति में उचित नहीं हैं। रविवार एवं राजकीय अवकाशों में बीएलओ को बिना अवकाश दिये कोल्हू के बैल में रूप काम में लिया गया है। इस समय विद्यालयों में नियमित कक्षा शिक्षण कार्य एवं परीक्षा कार्य चल रहा है लेकिन शिक्षकों के बीएलओ के रूप में एक-एक विद्यालय से चार व पांच-पांच शिक्षकों को नियुक्त करने से विद्यालयों में शिक्षण कार्य के साथ परीक्षा का कार्य जबरदस्त रूप से प्रभावित हो रहा है। लेकिन बीएलओ के रूप में नियुक्त शिक्षकों को हटाने के लिए न तो सरकार ध्यान दे रही हैं और न ही शिक्षा विभाग के अधिकारी। यहां तक कि नियम कायदे कानून को ताक में रखकर प्रतिनियुक्त शिक्षकों को भी बीएलओ ड्युटी में लगाने से निर्वाचन विभाग नही चुक रहा हैं। कई बीएलओ शिक्षक 10 व 15 वषों से कार्य कर रहे हैं। 55 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारी को बीएलओ नहीं बनाने के निर्वाचन विभाग के स्पष्ट आदेश की भी प्रशासनिक स्तर पर पालना नहीं किया जाना खेदजनक हैं। बीएलओ ड्युटी लेने से अथवा कार्य करने से यदि कोई शिक्षक वैधानिक रूप से मना कर देने पर उनके विरूद्ध निलम्बन कर सीसीए नियमों में कार्यवाही एवं वेतन वृद्धि रोक शिक्षकों को प्रताडित किया जाता हैं जो किसी भी स्थिति में न्यायोचित नही हैं। संगठन ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री से हस्तक्षेप कर राज्य के लगभग 60 हजार शिक्षकों को बीएलओ के रूप में कार्य करने से मुक्त कर राज्य की शिक्षण व्यवस्था को मजबुत बनाने में साहस दिखाने की आवश्यकता जताई।

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