जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

जबलपुर के शैल्बी, गैलेक्सी, मेडिकेयर में स्वास्थ्य अधिकारियों ने मारा छापा

तीनों अस्पतालों के खिलाफ यह कार्रवाई कलेक्टर कर्मवीर शर्मा और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रत्नेश कुरारिया के निर्देश पर की गई।

जबलपुर दर्पण। कोरोना महामारी की वैश्विक आपदा के इस दौर में तमाम निजी अस्पताल नियम कायदों की धज्जियां उड़ाकर किस तरह सिर्फ कमाई करने पर उतारू हैं इसका खुलासा शुक्रवार को तीन अस्पतालों में स्वास्थ्य विभाग की ताबड़तोड़ छापामारी में हुआ। जिन अस्पतालों में छापामारी की गई उनमें विजय नगर क्षेत्र स्थित शैल्बी हॉस्पिटल, गैलेक्सी हॉस्पिटल और मेडिकेयर हॉस्पिटल शामिल है। खास बात यह है कि गैलेक्सी अस्पताल में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी की आशंका सामने आई, वहीं शैल्बी अस्पताल प्रबंधन ने स्वास्थ्य अधिकारियों को इंजेक्शन का ब्यौरा देने से हाथ खड़े कर दिए। मेडिकेयर अस्पताल में भी तरह-तरह की गड़बड़ी सामने आई। कलेक्टर कर्मवीर शर्मा के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की छापामार टीम का नेतृत्व जिले के पूर्व सीएमएचओ डॉ मनीष मिश्रा ने किया। तीनों अस्पतालों के खिलाफ यह कार्रवाई मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रत्नेश कुरारिया के निर्देश पर की गई।

गैलेक्सी में कम मिले रेमडेसिविर इंजेक्शन:

बताया जाता है कि छापामार दल ने गैलेक्सी हॉस्पिटल में रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर तरह-तरह की गड़बड़ी मिली है। इस अस्पताल को जितने इंजेक्शन दिए गए थे, उसका ब्यौरा दस्तावेजों में नहीं मिल पाया। अस्पताल को ज्यादा मात्रा में इंजेक्शन दिए गए थे, जबकि दस्तावेजों के मुताबिक खपत कम हुई। शेष इंजेक्शन की मात्रा में कमी मिली जिससे कालाबाजारी की आशंका जताई जा रही है। यह आशंका भी जताई जा रही है कि अस्पताल प्रबंधन ने रेडक्रॉस से कम कीमत पर इंजेक्शन खरीदें और मरीजों को ज्यादा कीमत पर दिए गए।
टीम ने अस्पताल में भर्ती कोरोनावायरस संक्रमित मरीजों के स्वजन से बात की तो पता चला कि डेढ़ से दो लाख रुपये एडवांस में जमा कराने के बाद मरीजों को भर्ती किया गया इस मामले को लेकर टीम ने नाराजगी जताई और गैलेक्सी अस्पताल के प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया है। डॉ मनीष मिश्रा ने कहा कि कोविड-19 प्रोटोकॉल के अनुसार कोई भी अस्पताल मरीज को भर्ती करते समय स्वजन से ज्यादा पैसों की मांग नहीं कर सकता है। बातचीत के दौरान इस बात का भी पता चला कि सरकार द्वारा निर्धारित दर से कई गुना ज्यादा रकम कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए स्वजन से वसूली जा रही है।

शैल्बी में मनमानी, नहीं दी जानकारी, नोटिस जारी:

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शैल्बी अस्पताल में दस्तक दी। जहां कोरोना मरीजों के उपचार के लिए सरकार द्वारा जारी रेट लिस्ट का प्रदर्शन नहीं मिला। चिकित्सकों ने नाराजगी जताई तो पता चला कि रेट लिस्ट का बोर्ड तो लगा है लेकिन उसे ऐसी जगह रखा गया है ताकि वहां पहुंचने वाले मरीजों और उनके स्वजन की नजर ही ना पड़े। टीम ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति और खपत का ब्यौरा मांगा परंतु अस्पताल प्रबंधन जानकारी नहीं दे पाया। डॉ मनीष मिश्रा ने कहा कि घंटे भर चली जांच पड़ताल के बावजूद शेल्बी अस्पताल में सवालों के जवाब नहीं मिले, ना ही इंजेक्शन की खरीदी और खपत की जानकारी उपलब्ध कराई गई। अस्पताल संचालक को नोटिस जारी किया गया है।

मेडिकेयर में कम मिले रेमडेसिविर इंजेक्शन:

विजयनगर उखरी चौक क्षेत्र में डॉक्टर आशुतोष बाजपाई द्वारा संचालित मेडिकेयर अस्पताल में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी की आशंका सामने आई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल प्रबंधन से इंजेक्शन की खरीदी और खपत का ब्यौरा मांगा। दस्तावेजों का अवलोकन करने पर पता चला कि जितनी संख्या में रेडक्रॉस अथवा अन्य माध्यमों से इंजेक्शन की खरीदी की गई थी। अस्पताल में उतनी खपत नहीं हुई तथा अस्पताल में इंजेक्शन भी कम मिले। डॉ मनीष मिश्रा ने बताया कि मेडिकेयर अस्पताल संचालक को भी नोटिस जारी किया गया है।

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