कार्यालय में नही बैठते जिला शिक्षा अधिकारी,न ही उठाते फोन।

सतना जबलपुर दर्पण । जिला शिक्षा अधिकारी रीवा रामराज मिश्रा जब से जिला शिक्षा अधिकारी बने है तब से उनके तेवर सातवे आसमान पर है उनको किसी का डर नही है जब भी कार्यालय जाओ हमेशा खाली कुर्सी अपना ईमानदारी से काम करती रहती है और कई किलोमीटर दूर से आये शिक्षक व अन्य लोग कुर्सी को नमस्कार कर थक हार कर चले जाते है या कहीं अगले दिन मिलने की आस में होटलों का सहारा लेते है।
यदि कोई ब्यक्ति या पत्रकार किसी मामले में मिलना चाहता है या बाईट करना चाहता है तो उनसे मिलना टेड़ी खीर है। यदि किसी ने फोन लगा दिया तो उनके द्वारा फोन को नही उठाया जाता है सुनने में आया है कि उनके द्वारा अपने चहेते लोगो या अपने से ऊपर के अधिकारियों का फोन रिसीव किया जाता है बाकी लोगो के लिए कहा जाता हैं कि मेरी मर्जी चाहे मैं फोन उठाऊ या कार्यालय में न बैठूं,मेरा कोई कुछ नही बिगाड़ सकता है।
सही भी बात है कि जब सैया भये कोतवाल तो डर काहे का।
सवाल यही की क्या रीवा में खुलेआम अफसरशाही चलेगी? या इन अफसरों के ऊपर भी कोई है जो इनके कार्यप्रणाली पर रोक लगा सके। ताकि आम जनता और छोटे कर्मचारियो को न्याय मिल सके।
और जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय डूबा है भ्रष्टाचार के दलदल में
जिला शिक्षा कार्यालय रीवा और जिला शिक्षा अधिकारी उनके मातहत कर्मचारी चारों ओर भ्रष्टाचार मचाए हुए हैं शासकीय राशि का दुरुपयोग होना आम बात बन चुका हैरमसा का कर देखने वाला बाबू नारायण पांडे और मुख्य लिपिक ज्ञानेंद्र तिवारी जिला शिक्षा अधिकारी रामराज मिश्रा के मक्खन पालिश करने में सारा समय व्यतीत हो जाता है जब से रामराज मिश्रा जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर सुशोभित हुए हैं इसके पश्चात भ्रष्टाचार को विकास की ऊंचाइयों तक पहुंचाने के में कोई कमी नहीं कर रहे हैं और ना ही उनके सहयोगी ज्ञानेंद्र तिवारी और नारायण पांडे शासन की राशि को बंदर बांट निडर होकर कर रहे हैं कोई पत्रकार किसी कार्य के लिए कार्यालय पहुंचता है तो जिला शिक्षा अधिकारी की कुर्सी खाली रहती है और सारे कार्य जिला शिक्षा अधिकारी रामराज मिश्रा अपने आवास में ही निराकृत करते हैं या उनके विश्वासपात्र भ्रष्टाचारी दो मठाधीश ज्ञानेंद्र तिवारी मुख्य लिपि के जो अतिरिक्त प्रभार में कार्य देख रहे हैं वहीं पर नारायण पांडे जो कुबेर का दायित्व रमसा शाखा देख रहे हैं दोनों की भूमिका संदिग्ध है उनके पद स्थापना दिनांक से वर्तमान तक विभिन्न मदो जांच होनी चाहिए क्योंकि तत्कालीन रमसा शाखा के प्रभारी रहे पी एल मिश्रा ने 23 लख रुपए से अधिक का घोटाला किया है जो यह मामला आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग रीवा में लंबित है उल्लेखनीय मामला यह है कि शिक्षा विभाग जैसे पवित्र विभाग में अगर भ्रष्टाचार बताना तो शिक्षा का मंदिर का जो अस्तित्व पवित्र है निश्चित तौर पर ढाबा लगेगा और कलंकित करने के लिए दो महत्वपूर्ण योद्धा ज्ञानेंद्र तिवारी नारायण पांडे शिक्षा विभाग की व्यवस्था को चौपट और भ्रष्टाचार को विकास की ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम पूरी ताकत लगाकर कर रहे हैं जो जिला शिक्षा अधिकारी रामराज मिश्रा विश्वासपात्र हैं बरहाल देखना यह है कि शिक्षा विभाग के आयुक्त प्रमुख सचिव इस मामले को संज्ञान में लेकर उच्च स्तरीय दल के माध्यम से अगर निष्पक्ष पूर्ण तरीके से जांच होती है तो लाखों क्या करोड़ का घोटाला उजागर होगा किंतु प्रमुख सचिव शिक्षा विभाग और आयुक्त क्या रीवा जिला शिक्षा कार्यालय के भ्रष्टाचार के मामले में सख्त होंगे या नहीं होंगे यह तो आने वाला समय ही बताएगा



