साहित्य दर्पण
मौसम का हाल पूछो….

रोते हुए ये बादलों का हाल पूछो।
बरसती हुई बूंदों का मिजाज पूछो।
बिज़ली की तेज़ ग़ज़गड़ाहत से
बदलतें हुए मौसम का हाल पूछो।
पेड़ पौधें मधुर गीत गुनगुनाने लगे
कोई जाकर प्रकुति का हाल पूछो।
रँग बरंगी पँख फैलाकर नृत्य
करता मयुर से अपना हाल पूछो।
क्या ख़ुशी मिलती है बूंदों को गले
लगाकर मिट्टी की खुश्बू से पूछो।
अपनी ही मौज में तैरती हुई
कागज़ की कश्ती का हाल पूछो।
नीक राजपूत
9898693535



