साहित्य दर्पण

हसने वाले लोग

हमारे समाज में, हमारे रिश्तेदारों में, हमारे कार्यस्थल में बहुत सारे लोग हमे ऐसे मिल जाते हैं ,जिन्हें हँसने की आदत होती है ।चाहे हँसी का माहौल हो या ना हो उन्हें हँसी आती रहती है ।हँसना भी चाहिए, खुलकर हँसने से चेहरे की रौनक बढ़ती है। हँसने से चेहरे की मांसपेशी 45 मिनट तक आराम महसूस करती है ।मन में जमा मवाद निकलता है जिससे, मन हल्का होता है ।तनाव कम होता है ,चेहरे पर झुर्रियां नहीं पड़ती ,लोग लम्बे समय तक युवा दिख सकते है।हार्ड अटैक, कैंसर हाई, बीपी ,सुगर जैसी बीमारियों का खतरा 37% कम हो जाता है। तनाव, झगड़े ,नाराजगी से मुक्ति पाने का भी बेहतर तरीका है हँसना। इसलिए जब भी मौका मिले
खुशी का माहौल हो हँसना चाहिए ।खुद भी हँसना चाहिए और सामने वाले को भी हँसाना चाहिए।

आजकल की रोजमर्रा की जिंदगी में इतने तनाव इतनी परेशानियां होती हैं कि, लोग हँसना भूल गए हैं ।लेकिन वहीं कुछ लोग मजे ले ले कर हँसते है।
हँसना भी एक कला है ,खुशमिजाज लोगों का गहना है। ऐसे लोग खुद भी हँसते हैं और सामने वाले को भी हँसाते हैं ।सामनेवाले की परेशानियों को कम करने की कोशिश करते हैं ।वहीं कुछ लोग हमारे समाज में ऐसे भी होते हैं ,जिन्हें बेवजह हँसने की आदत होती है। सामने वाले को की कमी को देखकर हँसने की आदत होती है । सामने वाले में कमी ढूंढ ढूंढ कर हँसते रहते है ।ऐसे लोग कानाफूसी करने में भी माहिर होते हैं। कानाफूसी करना और हँसना ऐसे लोग की फितरत होती है। जो लोग संवेदनशील होते है भावुक और सच्चे होते हैं ऐसे लोग अक्सर हँसने वाले लोगो का शिकार बनते रहते हैं। ऐसे लोगों से हमेशा सावधान रहना चाहिए ।जो दूसरे को नीचा दिखा कर खुद को श्रेष्ठ साबित करते रहते हैं, दूसरो के साथ तुलना करके अपने आप को बेहतर बताते हैं ,एवं सामने वाले को छोटा करके दिखाते हैं ,ऐसे लोग समाज में समाजिक तनाव बढ़ाते हैं एवं ,रिश्तो में दूरियां पैदा करते हैं ।ऐसे लोगों से जितना हो सके बचना चाहिए।

ईश्वर के द्वारा यह संपूर्ण सृष्टि बनायी गई है और तरह तरह के जीव जंतु पेड़ पौधे मनुष्य ,ईश्वर के द्वारा बनाये गए हैं ,सब में कुछ ना कुछ अच्छाई होती है, तो कुछ ना कुछ बुराई होती है। कोई भी वस्तु या व्यक्ति सर्वगुण संपन्न नहीं होता हैं ,आधा उनमें गुण होते हैं आधा उसमें दोष भी होते हैं। जो लोग विद्वान हैं समझदार हैं वे अपनी कमी को समझते हैं एवं अपने गुण से उस कमी को छिपा लेते है अवगुण पर विजय पा लेते हैं । अपने अवगुण को अपने गुण के द्वारा ढक लेते हैं ।परंतु जो लोग कम पढ़े लिखे है ,अधकचरा शिक्षा के शिकार होते है ,वे गुणों का बखान बढ़-चढ़कर पेश करते हैं ।हमेशा अपनी तुलना सामने वाले के साथ करते हैं, एवं सामने वाले को नीचा दिखाना और अपने आप को ऊँचा दिखाना ही उनका एकमात्र उद्देश्य होता हैं। अपने अन्दर के अवगुण को देख कर भी नहीं देखना चाहते है, और ना ही उसमें सुधार करना चाहते हैं ।चाहते तो बस इतना ही है कि वह हमेशा सामने वाले पर हँसते रहें जो कि सरासर गलत है।
विविधता से भरे इस संसार में गुणों की पूजा होती है, परंतु ऐसे लोग सामने वाले में गुण ही नहीं देख सकते है।ऐसे लोग सिर्फ अवगुण देखते हैं एवं उसे गिन गिन कर हँसते रहते हैं ।हँसना ऐसे इंसानो की सबसे बड़ी कमजोरी होती है ।इसलिए ऐसे लोगों से बचना चाहिए, और जी भर कर हँसना चाहिए। हँसने के लिए हँसना चाहिए, खुश रहने के लिए हँसना चाहिए सामने वाले को हँसाने के लिए हँसना चाहिए। हँसी का माहौल बनाने के लिए हँसना चाहिए ना कि, किसी कमजोर व्यक्ति की कमजोरी पर हँसने के लिए हँसना चाहिए।

ईश्वर की बनाई इस सृष्टि में सब कुछ अद्भुत और बेजोड़ है यदि हम अवगुण खोज निकलते है तो, हमें सिर्फ अवगुण ही मिलेंगे, और गुण खोजने निकलेंगे हमे गुण मिलेगे। इसीलिए हमे अपने अंदर अच्छे संस्कारों का विकास करना चाहिए। सामाजिक माहौल को अच्छा बनाने का प्रयास करना चाहिए। रिश्तो को अच्छा बनाने का प्रयास करना चाहिए । हमे कभी भी किसी की भी जरूरत पर सकती है,
इसलिए हर किसी से अच्छा व्यवहार करना चाहिए। कभी-कभी ऐसा होता है कि हँसने वाले लोगों को भी रोना पड़ जाता है क्योंकि ,अपनी खराब आदत की वजह से मुसीबत में फस जाते है ,मुश्किल का सामना करते है ऐसे वक्त में ये लोग अकेले पड़ जाते है।इसलिए सावधानी से हँसे , खुश रहने के लिए हँसे, हँसाने के लिए हँसे ।

सुनीता कुमारी
पूर्णियाँ ,बिहार।

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