52 वर्ष की उम्र में 126 बार किया रक्तदान

जबलपुर। रक्तदान करके किसी का जीवन तो बचाया ही जाता है और साथ में ही खुद की सेहत को भी बेहतर बनाया जाता है, ऐसा कहना है जिले के 126 बार रक्तदान कर चुके समाजसेवी सरबजीत सिंह नारंग का, जो न केवल समाज के लिए स्वयं मिसाल हैं, बल्कि हर वर्ग व परिवार के लिए प्रेणा के स्त्रोत हैं, जिनके द्वारा खुद तो रक्तदान किया जाता है और अपने परिवार के सभी सदस्य पत्नि व बच्चों के अलावा अपने सभी परिचितों से भी रक्तदान करवाते हैं। इस प्रकार के महान काम करने में सरबजीत सिंह नारंग ने संस्कारधानी में अपनी एक अलग छवि बनाई है।
समाजसेवी सरबजीत सिंह नारंग ने बताया कि उनकी 52 वर्ष है, उन्होंने अभी तक 126 बार रक्तदान करके कई पीडि़तों का जीवन बचाने का काम किया है। इस संबंध में उन्होंने बताया कि इतनी उम्र में उन्होंने इतनी अधिक संख्या में ब्लड का दान इसलिए कर पाए हैं, क्योंकि वह शुरू से ही समाजसेवा के क्षेत्र में आगे रहकर हर किसी की मदद करना चाहत थे और इस काम के लिए उनके परिजन भी उनका पूरा समर्थन करते हैं। आगे उन्होंने बताया कि 96 बार होल ब्लड व 30 बार एसडीपी का दान किया है। इस प्रकार से अभी तक उन्होंने 126 बार रक्तदान कर चुके हैं।
माह में चार बार दान की जा सकती है एसडीपी-विशेषज्ञों के अनुसार एफेरिसिस मशीन के माध्यम से एसडीपी यानि की सिंगल डोनर प्लेटलेट्स विधि से एक ही डोनर से मरीज की जरूरत के अनुसार प्लेटलेट्स निकाली जाती है, जबकि जानकार बताते हैं कि पहले इसके लिए तीन से चार डोनर का ब्लड लिया जाता था। फिर प्लेटलेट्स अलग किया जाता था। एसडीपी ब्लड के जरिए एक घंटे में प्लेटलेट्स निकालता है। डोनर के शरीर से ब्लड निकालकर मशीन में ले जाया जाता है, वहां से प्लेटलेट्स अलग होकर मरीज के लिए निकाला जाता है और बाकि ब्लड दोबारा डोनर के शरीर में पहुंच जाता है। खास बात यह भी है कि प्लेटलेट्स देने वाला स्वस्थ्य व्यक्ति 72 घंटे बाद दोबारा प्लेटलेट्स दे सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि प्लेटलेट्स डेंगू, कैंसर सहित अन्य मरीजों के काम आती है।



