नई दिल्ली

विपक्ष की दूसरी बैठक से पहले बीजेपी ने गठबंधन कर बदल डाले कई राज्यों के समीकरण

नई दिल्ली। विपक्ष एकजुटता को देखते हुए एनडीए ने भी एक सप्ताह में 6 नए दलों को अपने साथ जोड़ लिया है. इन पार्टियों का एनडीए के साथ जुड़ने के साथ ही बीजेपी ने राज्यों के जातीय समीकरण भी बदल दिया हैं. 

साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव का सबसे बड़ी चर्चा का मुद्दा होगा कि कितनी विपक्षी पार्टियों बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए के खिलाफ गठबंधन में शामिल हैं. इस एकता की नींव बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पहल पर शुरू की गई है. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी अब इसमें साथ आते दिखाई दे रही हैं. लेकिन अभी सब कुछ फाइनल नहीं किया जा सका है. 

विपक्षी एकता की दूसरी बैठक चल रही है. दो दिवसीय बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हुई है, क्योंकि बीजेपी के खिलाफ लड़ने का फॉर्मूला इसी बैठक में तय किया जा सकता है. 

हालांकि पहली बैठक और दूसरी बैठक के बीच राजनीतिक समीकरण लगभग बदल गए हैं. एक तरफ जहां विपक्षी एकता में बड़े नेता के तौर पर देखे जाने वाले शरद पवार की पार्टी एनसीपी टूट चुकी है और फिलहाल पवार अपनी पार्टी को बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं. वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के मुकाबले एनडीए की ताकत दिखाने के लिए बीजेपी ने एक सप्ताह में 6 नए दलों को अपने साथ जोड़ लिया है. इन पार्टियों का एनडीए के साथ जुड़ने के साथ ही बीजेपी ने कई राज्यों के जातीय समीकरण भी बदल दिए हैं. 

विपक्षी एकता की दूसरी बैठक बेंगलुरु में है और इस बार एनसीपी नेता शरद पवार भी हिस्सा होंगे तो वहीं उनके भतीजे अजीत पवार दिल्ली में होने वाली एनडीए की बैठक में शामिल होंगे. ठीक इसी तरह अपना दल की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल 18 जुलाई को होने वाले  बैठक में शामिल होंगी तो वहीं मीडिया में छपी कुछ खबरों की मानें तो अपना दल में दूसरे गुट की अध्यक्ष और अनुप्रिया की मां कृष्णा पटेल विपक्ष की बैठक में जा सकती हैं. इसके अलावा विपक्षी एकता की पहली शामिल हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल अब एनडीए बैठक में शामिल होंगे.

ऐसे में सवाल उठता है कि विपक्षी एकजुटता की दूसरी बैठक से पहले एनडीए ने किन राज्यों का जातीय समीकरण बदलकर रखा है और इससे विपक्ष को कितना नुकसान हो सकता है? 

*पहले जानते हैं एनडीए में जुड़ने वाले 6 दल कौन कौन से हैं*

पटना बैठक में शामिल हुए कई पार्टियों ने दूसरे बैठक से पहले एनडीए का हाथ थाम लिया है. जिसके बाद महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश इन तीन राज्यों में बीजेपी को नए सहयोगी मिल गए हैं. एनडीए में पहले से ही 24 दल शामिल थे. अब नए 6 दलों के जुड़ने के बाद इस पार्टी में दलों की संख्या 30 हो गई है. इन नए 6 दलों में के नाम हैं, अजीत गुट की एनसीपी, लोकजनशक्ति पार्टी (चिराग गुट),  जेडीयू की सहयोगी हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा , आरएलएसपी (उपेंद्र कुशवाहा), वीआईपी (मुकेश सहनी) और सुभासपा (ओमप्रकाश राजभर). 

*इन पार्टियों से पहले एनडीए में ये 24 दल थे शामिल*

शिवसेना शिंदे गुट, अन्नाद्रमुक, एनपीपी, एनडीपीपी, जेजेपी, एसकेएम, बीपीपी, आईएमकेएमके, आईटीएफटी, आजसू, एमएनएफ, तमिल मनीला कांग्रेस, पीएमके, अपना दल एस, एमजीपीस, एजीपी, लोजपा, निषाद पार्टी, यूपीपीएल, अखिल भारतीय एनआर कांग्रेस पुदुचेरी, अकाली दल ढ़ीडसा, आरपीआई और पवन कल्यान की जनसेना. 

*बीजेपी ने गठबंधन कर इन राज्यों का बदला जातीय समीकरण?*

*उत्तर प्रदेश की 32 लोकसभा सीटों पर पड़ेगा असर:* ओबीसी नेताओं में बड़ा चेहरा माने जाने वाले ओम प्रकाश राजभर बीते शनिवार एनडीए में शामिल हो गए. 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले राजभर का एनडीए में शामिल होना बीजेपी के चुनावी अभियान को और भी मजबूती देने का काम करेगा. 

दरअसल इस चुनाव से पहले बीजेपी का हिंदी पट्टी में पिछड़ी जातियों के बीच पैठ बनाना बेहद जरूरी है क्योंकि विपक्ष लगातार ओबीसी जनगणना समेत कई मुद्दों को उठाते हुए बीजेपी को घेर चुकी है. जबकि केंद्र सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग की जनगणना की मांग पर अब तक चुप्पी साधे हुए है. 

ऐसे में ओम प्रकाश राजभर यूपी के पूर्वांचल की लगभग 32 लोकसभा सीटों पर खुद के प्रभाव का दावा करते हैं और अगर सुभासपा बीजेपी के साथ मैदान में उतरती है तो एनडीए पूर्वांचल में अपने सियासी आधार को मजबूत बनाए रख पाएगी. बता दें कि साल 2017 में हुए उत्तर प्रदेश की विधानसभा चुनाव में सुभासपा भारतीय जनता पार्टी एक साथ मैदान में उतरी थी. उस वक्त राजभर की पार्टी ने 6 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे और 4 सीटें जीती थीं.  

साल 2022 में हुए विधानसभा चुनाव की बात करें तो सुभासपा समाजवादी पार्टी से गठबंधन कर मैदान में उतरी थी और कुल 18 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे. हालांकि इस बार उन्हें सिर्फ 6 सीटों ही मिल पाईं लेकिन कई सीटों पर बीजेपी का समीकरण भी गड़बड़ा गया और पार्टी को हार का सामना करना पड़ा.

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