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राजगढ के सासी गैंग की प्रदेश में दस्तक:बरात घर,मैरिज गार्डन आयोजकों से सतर्कता की अपील

अनजान बच्चा या व्यक्ति शादी समारोह स्थल पर घूमता दिखे,उसकी सूचना नजदीकी थाने वं कन्ट्रोलरूम दूरभाष न 2676100, 2676102 एव 100 डायल पर दे,ताकि उनकी तस्दीक की जा सके।

जबलपुर दर्पण/नगर ब्यूरो। जबलपुर जिले में शादी समारोहों में बढ़ती चोरी की घटनाओं को देखते हुए जबलपुर पुलिस अधीक्षक श्री बहुगुणा ने शादी समारोह के दौरान समस्त बरात घर,मैरिज गार्डन संचालकों एवं शादी समारोह का आयोजन करने वाले आयोजकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील करते हुए बताया कि अन्य जिलों में भी शादी के दौरान चोरी की घटनायें हो रही हैं,ऐसा ही एक मामला 2 दिन पहले सरगुजा जिले के अम्बिकापुर का आया है। जहा एक होटल मे शादी कार्यक्रम में  नगदी सहित 50 लाख रूपये कीमती जेवर की चोरी हुई है। एवं लगभग 1 माह पूर्व कटनी जिले में शादी कार्यक्रम के दौरान 5 लाख रूपये की चोरी हुई थी, जिसमें राजगढ के सासी गैंग के लोग पकड़े गये थे। जॉच में पता चला है कि अधिकांश चोरी की घटना राजगढ जिले के सासी गैंग के द्वारा अंजाम दी जा रही है। सासी गैंग के 8 से 15 साल के बच्चे समारोह स्थलों पर सक्रिय रहकर मौका मिलते ही चोरी की घटना को अंजाम देते है। जिनकी पहचान कर पाना बड़ा मुशकिल होता है। पुलिस अधीक्षक श्री बहुगुणा ने जबलपुर जिले के समस्त बरात घर,मैरिज गार्डन संचालकों एवं शादी समारोह का आयोजन करने वाले आयोजकों से अपील की है। कि शादी समारोह के दौरान अंनजान बच्चों एवं लोगों पर विशेष निगाह रखें,साथ ही अपना कीमती सामान जेवर,नगदी आदि सुरक्षित स्थान पर रखें,कोई भी अनजान बच्चा या व्यक्ति शादी समारोह स्थल पर संदिग्ध अवस्था में घूमता दिखे तो उसकी सूचना तत्काल नजदीकी थाने एवं कन्ट्रोलरूम के दूरभाष 2676100, 2676102 एवं 100  डायल पर तुरंत दें ताकि उनकी तस्दीक की जा सके।
एक नज़र सासी गैंग पर-दो से तीन लाख रूपये में सासी गैंग की ट्रेनिंग जिसमें जेब काटना,बैग पार करना,वारदात के बाद फरार होना सिखाते हैं। गांवों में बच्चों को ट्रेनिंग सासी गैंग के बड़े सरगना देते हैं। इसके लिए बच्चों के माता पिता से बाकायदा फीस ली जाती है। यह फीस दो से तीन लाख रुपए एक बच्चे की होती है। सासी गैंग के बच्चों को 12 से 13 साल की उम्र में ही इस ट्रेनिंग की शुरुआत इनके माता पिता के द्वारा कर दी जाती है। आपको यह जानकर हैरानी होगी, बच्चों के मां-बाप खुद उसे ट्रेनिंग के लिए भेजते हैं। और यह भी चेक करते हैं कि कौन सा सरगना कितनी अच्छी ट्रेनिंग दे सकता है। इस ट्रेनिंग में बच्चे को जेब तराशना,भीड़ के बीच से रकम का बैग व जेवर पार करना,फरार होना। पुलिस पकड़ ले तो कैसे बचना है। व पुलिस की मार कैसे सहन करनी है। यह सब सिखाया जाता है। इसके बाद उसे एक साल के लिए गैंग में काम पर रखा जाता है। जिसकी एवज में सरगना उसके मां बाप को साल के तीन से पांच लाख रुपए का भुगतान करता है। इसके लिए ये अपने बच्चों को 10 से 12 साल की उम्र में ही ट्रेनिंग देना शुरू करवा देते हैं।

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