त्रिरत्न बुध्द विहार निर्भय नगर में मनाई सावित्री बाई फुले की जयंती

जबलपुर दर्पण। त्रिरत्न बुध्द विहार निर्भय नगर अधारताल में प्रथम शिक्षिका ज्ञान ज्योति राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले की जयंती के अवसर पर धम्म प्रचारक अर्जून पाटिल ने धम्म दीप प्रज्जवलित की पारमी पाटिल ने सावित्री बाई फुले की छायाचित्र पर माल्यपर्ण किया। निर्मला पाटिल ने सावित्री बाई फुले के छायाचित्र पर माल्यपर्ण किया। पंचशील मेश्राम ने तथा गौतम बुध्द एवं डॉ बाबा साहेब भीमराव आम्बेडकर और सावित्री बाई फुले की वंदना की। रमा झोडापे जी ने सावित्री बाई फुले के बारे में बताया कि इनका जन्म दिन 03 जनवरी 1831 को नायगांव खण्डाला जिला सतारा महाराष्ट्र में हुआ। इनके के पिता का नाम खंडोजी नेवसे पाटिल तथा उनकी माताजी का नाम लक्ष्मीबाई था। और सावित्री बाई फुले की जब 9 वर्ष की हुई तब 13 वर्ष के ज्योतिबा फुले से विवाह सम्पन्न हुआ था। सावित्री बाई फुले को उनके पति ज्योतिबा फुले ने घर पर ही पढ़ना-लिखना सिखाया था। सावित्री बाई फुले ने महिलाओं एवं बलिकाओ के लिए एक गर्ल्स स्कूल की स्थापना 01-01-1848 को की। समाज के लोग उन पर गोबर, धुल, पत्थर इत्यादि फेंकते तथा उन्हें तरह-तरह से अपमानित करने की कोशिश करते जिससे की शिक्षिका सावित्री बाई फुले छात्राओ को पढ़ाने का कार्य बन्द कर दें। अपने साथ एक साड़ी लेकर जाती जिससे गन्दी होने पर स्कूल में बदल लेती थी। इनहोने महिला शिक्षिकाओं को प्रशिक्षिण के लिए भी एक प्रशिक्षण केन्द की स्थापना की तथा फातिमा शेख प्रथम महिला मुस्लिम शिक्षिका बनी। इय अवसर पर अर्जून पाटिल, वीरेन्द्र बौध्द, के.एस.झोडापे, पंकज मेश्राम, ओमप्रकाश गोडाने, जे.ए. रामटेके, रमा झोडापे, निर्मला पाटिल, छाया रायबोले आदि उपस्थिति रहे।



