जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

शिक्षा विभाग को चापलूसों ने घेरा एवं छुटभइये नेताओं का डेरा

सइंया भये कोतवाल तो अब डर काहे का..!

जबलपुर दर्पण। मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वर्तमान में शिक्षा विभाग में लगभग सभी कार्यालयों में छोटे -बड़े सभी अधिकारियों को विभागीय सलाहकारों की आवश्यकता पड़ने लगी है।कुछ चुनिंदा चापलूसी वाले लोकसेवक एवं छुटभइये नेता अब इन अधिकारीयों के दरबारी बन गए हैँ इनकी सलाह इनसे राय -मशवरा लेने के बाद ही काम आगे बढ़ता है।ये दरबारी जिन्हें कार्यालय के नवरत्न के रूप में जाना जाने लगा है,इनकी अधिकारीयों पर पकड़ तगडी है कभी कभी तो ये स्वयं साहब की भूमिका अदा करने से भी नहीं चूकते।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर के अनुसार ये झूठ मुठ के साहब अपने-अपने मनपसंद चहेता लोकसेवको को विशेष लाभ दिलाने के लिए अक्सर कार्यालय में नज़र आ जाते हैं।जबकि इन्हें अपने-अपने मूल कार्य स्थल पर उपस्थित होना चाहिए किन्तु ऐसा प्रतीत होता है कि इन्हें इस कार्य से ही फुर्सत नहीं है तो ये अपना मूल कार्य कैसे और क्यों करेंगे साहबी जो झाड़ना है। मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर ने आगे बताया कि मूल पदस्थापना की जगह तो इनका जोरदार रोब और ख़ौफ़ है,कि ये झूठ मुठ के साहब वरिष्ठ कार्यालय में ख़ास है, इनकी ऊपर तक पहुँच हैँ, अधिकारी इनकी सलाह लिए बिना कोई काम नहीं करते एक डग भी नहीं रखते।एक विशेषता और है ये खुफियागिरी में माहिर हैँ। कब किसे निपटा दें भरोसा नहीं यही कारण है, कि कोई इनसे उलझना नहीं चाहता क्या पता बेचारा अगले ही दिन निपट जाये। मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर के अनुसार कुछ दरबारी तो ये समझ बैठे हैं,कि अब तो सइंया बने कोतवाल तो अब डर काहे का..! अधिकारी कोई भी आयें ,यह बहरुपिए उनके ख़ास बन ही जाते हैं, इस कला में निपुण हैं इन्हें विशेष योग्यता प्राप्त है।कई बार देखा जाता है कि ऐसे कर्मचारियों के मूल कार्य स्थल के काम पिछड़ जाते हैं। इनके द्वारा अपनी अपनी संस्था का मूल कार्य नाम मात्र भर किया जाता है। क्योंकि ये तो वरिष्ठ कार्यालय की ठेकेदारी प्रथा में शामिल हैं, कुछ महत्वपूर्ण कार्य में ये अपना उल्लू भी सीधा कर लेते हैं। हींग लगे न फिटकरी और रंग चोखा। समय समय पर ये कार्यालय द्वारा निकाले गए आदेशों /नियमों में अपने अपने प्रियजनों को साफ बचाकर अपनी वाहवाही लूटते रहते हैँ।प्रायः देखा जाता है कि अवकाश के दिनों एवं कार्यालयीन समय के बाद भी लगभग सभी कार्यालय खुले रहते है,तो ऐसे प्रतीत होता है कि दाल में कुछ काला है या पूरी दाल काली है। मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के दिलीप सिंह ठाकुर, माधव पाण्डेय,ऋषि पाठक,अरविन्द विश्वकर्मा, जी आर झारिया, विश्वनाथ सिंह, नितिन तिवारी, अजब सिंह, इमरत सेन, पवन सोयाम भास्कर गुप्ता, महेश मेहरा, भोजराज विश्वकर्मा, आदेश विश्वकर्मा, सुल्तान सिंह, देवराज सिंह, डेलन सिंह, राशिद अली, पुष्पा रघुवंशी, चंदा सोनी, रेनू बुनकर, अर्चना भट्ट, गंगाराम साहू, भोगीराम चौकसे, चंद्रभान साहू, अंजनी उपाध्याय, सतीश खरे, सुधीर गौर, ब्रजवती आर्मो, सुमिता इंगले, अम्बिका हँतिमारे, शबनम खान, गीता कोल, सरोज कोल, कल्पना ठाकुर, रामदयाल उइके, रामकिशोर इपाचे, धर्मेंद्र परिहार, शायदा खान, विष्णु झारिया, अजय श्रीपाल, सुरेंद्र परसते इत्यादि ने आदरणीय अधिकारीगण से सतर्कता के साथ अपने स्व विवेक से निर्णय लेने एवं चापलूस रागदरबारियों तथा छुटभइये नेताओं से दूरी बनाकर अपने आप को सुरक्षित रहने की सर्वोत्तम सलाह प्रेषित की है क्योंकि पूर्व में अनेकों बार दुर्घटनाए हो चुकी है इसलिए कहावत सही है,कि “दूध का जला भी छाछ फूँक फूँककर पीता है “

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