जिला अस्पताल के नए भवन में संचालित बच्चा वार्ड की दुर्दशा

सीधी जबलपुर दर्पण । जिला अस्पताल के नए भवन में संचालित बच्चा वार्ड दुर्दशा का शिकार है। काफी बड़े क्षेत्र में बने बच्चा वार्ड के बरामदों एवं शौंचालयों में जगह-जगह गंदगी फैली हुई है। स्थिति यह है कि बरामदों की सूरत ही गंदगी के चलते बदल गई है। साफ-सफाई सही तरीके से न होने के कारण बरामदे की दीवारों एवं फर्श में लाल परत जम चुकी है। चर्चा के दौरान वार्ड में मरीज भर्ती किए हुए कुछ परिजनों ने बताया कि साफ-सफाई के लिए जो कर्मचारी यहां पहुंचते हैं उनके द्वारा सही तरीके से सफाई नहीं की जाती। सफाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जाती हैं। इसी वजह से शौंचालय की हालत ऐसी है कि वह उपयोग के लायक ही नहीं रहता। इसी तरह बरामदों में साफ-सफाई सही तरीके से न होने के कारण दीवार एवं फर्श में लाल रंग की मोटी परत जम गई है। बताते चलें कि बच्चा वार्ड एवं प्रसूती वार्ड नए भवन में गत वर्ष से ही संचालित किया गया है। करोड़ों की लागत से नया भवन सर्वसुविधायुक्त बनाया गया था किंतु साफ-सफाई एवं देखरेख के अभाव में यह भवन जगह-जगह से अनुपयोगी होने लगा है। इसका कारण यहां मरीजों के परिजनों द्वारा गंदगी फैलाना एवं साफ- सफाई की व्यवस्था को नजर अंदाज करना है। वहीं साफ-सफाई की जिम्मेदारी जिन कर्मचारियों के ऊपर है उनके द्वारा भी सही तरीके से फिनैल का उपयोग किए ही साफ-सफाई की औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं। ऐसा मालूम होता है कि जिला अस्पताल के नए भवन का जायजा लेने की जरूरत अस्पताल प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारी नहीं समझते। साफ-सफाई के प्रति जिस तरह से लापरवाही नए भवन में देखी जा रही है उसके चलते जहां मरीजों के परिजनों में आक्रोश देखा जाता है वहीं उनकी यह भी शिकायत है कि इसका खामियाजा मरीज लेकर आने वाले लोगों को ही भुगतने की मजबूरी बनी रहती है। जबकि जिला अस्पताल में साफ-सफाई की व्यवस्था के नाम पर ही वर्ष में करोड़ों की राशि खर्च हो रही है। साफ-सफाई की व्यवस्था केवल अस्पताल के बाहरी क्षेत्र में ही सही करने की जरूरत समझी जाती है। अंदर वार्डों के बरामदों एवं शौंचालयों की व्यवस्था को पूरी तरह से लापरवाही में तब्दील कर दिया गया है। इसी वजह से नया भवन ऐसा आभाष होता है कि दशकों पुराना है। यदि सही व्यवस्थाएं बनाई जाती तो उसकी हालत सालों तक अच्छी बनी रहती।
बिजली गुल होने पर नहीं चलता जनरेटर-जिला अस्पताल के नए भवन में बच्चा एवं प्रसूती महिलाओं का वार्ड संचालित हो रहा है। इस वजह से यहां के वार्ड पूरी तरह से व्यस्त रहते हैं। मरीज के साथ तीमारदारी के लिए कई परिजन मौजूद रहते हैं। विडंबना यह है कि यहां बिजली गुल होने पर लगा जनरेटर चलाने की जरूरत नहीं समझी जाती। अधिकांशत: बिजली की सप्लाई जिला मुख्यालय होने के कारण बनी रहती है। यदि किसी कारणों से बिजली की सप्लाई ठप्प हुई तो यहां लगा जनरेटर चलाने की जरूरत नहीं समझी जाती। खासतौर से रात के समय यदि बिजली की सप्लाई बंद हुई तो मरीज एवं उसके परिजनों को उमस भरी गर्मी में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता। यहां मच्छरों का प्रकोप भी रात में काफी ज्यादा रहता है। जिसके कारण मरीज के साथ उपस्थिति लोग रात में बिजली गुल होने पर भवन के बाहर निकलकर चहलकदमी करते हुए बिजली आने का इंतजार करते रहते हैं। लाखों की लागत से काफी क्षमता वाला जनरेटर नए भवन में लगा है लेकिन इसका उपयोग न होने से यह केवल शो-पीस बना हुआ है। ऐसा आभाष होता है कि जनरेटर चलाने के लिए किसी भी कर्मचारी को यहां अधिकृत नहीं किया गया है। इसी वजह से वार्ड में मौजूद स्वास्थ्य कर्मी भी बिजली गुल होने पर यही जवाब देते हैं कि जब सप्लाई चालू होगी तभी प्रकाश एवं पंखे चलेंगे।



