प्रदेश बजट में घोषित 11 नए औद्योगिक क्षेत्रो में महाकोशल अंचल/जबलपुर का नामोनिशान नही, सौतेला व्यवहार बंद हो : चेम्बर

जबलपुर दर्पण। महाकोशल चेम्बर ऑफ़ कॉमर्स एण्ड इंण्डस्ट्री द्वारामध्यप्रदेश के प्रस्तुत 2022-23 के बजट में प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए ११ नए औद्योगिक क्षेत्र बनाने की घोषणा में महाकोशल अंचल सहित जबलपुर क्षेत्र को घोषित नामो में नजर अंदाज कर दिया गया है | मानसेवी मंत्री शंकर नाग्देव ने बताया इससे ऐसा महसूस होता है प्रदेश सरकार इस अंचल/जबलपुर को इस प्रदेश का हिस्सा ही नही मानती कोरोना काल में बुरी तरह प्रभावित उद्योगों की पुनरस्थापना करने व स्थायित्व बनाए रखने हेतु बजट में कोई प्रावधान नही करना दुर्भाग्यपूर्ण है बिजली में उद्योगों को सरकार से सब्सीडी की आशा थी परन्तु घोषित की गई 21 हजार करोड़ की सब्सीडी में उद्योगों को एक धेला भी नही दिया गया जबकि पीथमपुर इंदौर में सरकार ने 3 रूपए 60 पैसे प्रतियूनिट बिजली विशेष क्षेत्र के उद्योगों को देने की घोषणा की है परन्तु ऐसी बिजली देने की महाकोशल/जबलपुर अंचल में ऐसी कोई योजना आज दिन तक घोषित नही की गई जबकि प्रदेश के मालवा जैसे विकसित औद्योगिक क्षेत्र में औद्योगिक क्षेत्र भी दिए जा रहे है और सस्ती बिजली भी दी जा रही है प्रदेश के गठन के बाद से ही महाकोशल/जबलपुर अंचल के साथ हो रहे हर क्षेत्र में सौतेलापन करते हुए अन्यया किया जा रहा है इस क्षेत्र की जनता अब इसे अधिक समय तक बर्दाश नही करेगी अत: सरकार से महाकोशल चेम्बर के अध्यक्ष रवि गुप्ता, उपाध्यक्ष राजेश चंडोक, हेमराज अग्रवाल, शंकर नाग्देव, युवराज जैन गढ़ावाल, अखिल मिश्र, अनूप अग्रवाल, अनिल जैन पाली ,प्रदीप बिस्वारी व हर नारायण सिंह राजपूत ने मांग करते हुए इन 11 नए घोषित औद्योगिक क्षेत्रो में से इस अंचल के समग्र औद्योगिक विकास के लिए महाकोशल के हिस्से में 3-5 नए औद्योगिक क्षेत्र बनाने की घोषणा होना चाहिए साथ ही जिस प्रकार पीथमपुर में विशेष क्षेत्र को सस्ती बिजली दी गई है महाकोशल अंचल/जबलपुर के भी किसी विशेष क्षेत्र को सस्ती बिजली दी जाए यदि सरकार इस विषय पर विचार नही करेगी तो इस मांग को लेकर पुरे अंचल में वृहद आंदोलन छेड़ा जाएगा |



