गांव के दबंगों के चलते दलित दुल्हे को घोड़ी पर चढ़ने:लेना पड़ा प्रशासन का सहारा

कलेक्टर एसपी ने मौके पर पहुंच कर दूल्हे के लिए की चाक-चौबंद व्यवस्था:घोड़ी पर बैठा कर पूरे गांव में गाजे बाजे से निकाली रछवाई
जबलपुर दर्पण जबेरा संवाददाता। तेंदूखेड़ा के तेजगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत सागोरिया गांव में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है जिसमें दलित समाज के 23 वर्षीय नीरज पिता उत्तम अहिरवार जो कि ग्रेजुएशन में फाइनल कर चुका है और बीएससी नर्सिंग के सेकंड ईयर का स्टूडेंट है जिसकी शादी जिले के ही पटेरा तहसील में होनी थी और 20 अप्रैल को बारात जाना थी लेकिन शादी की तैयारी के दौरान जब मामला दलित दूल्हे की घोड़ी पर चढ़ने की बात सामने आई तो गांव के लोधी समुदाय के लोगों द्वारा इस बात का विरोध किया गया जिसके चलते नीरज अहिरवार द्वारा करीब 2 दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल कर स्वयं की रछवाई में घोड़ी पर चढ़ने को लेकर प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई गई जिसके बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया बीते 24 घंटे से नीरज अहिरवार के घर पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर उसको सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है। मामले में स्वयं कलेक्टर एस कृष्ण चैतन्य एवं पुलिस अधीक्षक डीआर तेनिवार ग्राम सागोरिया गांव पहुंचे और पूरे गांव का भ्रमण कर धार्मिक स्थलों का निरीक्षण किया जहां पर दूल्हे नीरज अहिरवार को घोड़ी पर सवार होकर के (रछवाई) रस्म के दौरान पूजा करने के लिए गांव के लोधियों के दरवाजो से होकर गुजरना था जिनको द्वारा कार्यक्रम का विरोध किया जा रहा है। प्रशासन की चाक चौबंद व्यवस्था से यह सम्भव हो पाया है। जब इस मामले में दलित दूल्हे नीरज से बात की गई तो नीरज का कहना है कि गांव के लोगों ने कभी भी दलित को घोड़ी पर नही चढ़ने दिया और मेरी शादी मैं घोड़ी पर चढ़ने का जिक्र जब गांव वालों के सामने आया तो इस बात का जमकर के विरोध हुआ है जिसके बाद मैंने प्रशासन के साथ-साथ और भी अन्य जगह मामले में सुरक्षा की मांग की है और मेरी किसी से कोई बुराई नहीं है मैं यही चाहता हूं कि जिस दौरान में घोड़ी पर चढ़ू उस दौरान मुझे और मेरे परिवार को प्रशासन पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराए जिससे किसी भी प्रकार की अनहोनी ना हो सके। वही इस मामले में नीरज की माता बीना बाई और पिता उत्तम अहिरवार का कहना है कि अब समय बदल चुका है और लोगों को इस बात को समझना चाहिए साथ ही नीरज की मां बीनाबाई का कहना है की दूल्हा किसी भी जाति का हो वह एक दिन का राजा होता है और गांव के लोगों को इस बात को समझना चाहिए हमारे परिवार से हम लोग घोड़ी पर नहीं चढ़ रहे हैं जो दूल्हा है सिर्फ वही घोड़े पर चढ़ेगा और जब गांव के बाकी दूल्हे घोड़ी पर चढ़ सकते हैं तो फिर मेरा बेटा दूल्हा घोड़ी पर क्यों नहीं चढ़ सकता है।




