शिक्षा शेरनी का दूध है जो पियेगा वो शेर की तरह दहाड़ेगा-डॉ. भीमराव अम्बेडकर

जबलपुर दर्पण । भारत के संविधान निर्माता, सामाजिक न्याय के प्रबल योद्धा और समता के महामंत्रदाता डाॅ. भीमराव रामजी अम्बेडकर जी के 70वें महापरिनिर्माण के अवसर पर शांतम प्रज्ञा आश्रम नशा मुक्ति, मनोआरोग्य, दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया, इस अवसर पर भारत रत्न डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के तेलचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गईं, इस अवसर पर शांतम प्रज्ञा आश्रम के संचालक साइकोलॉजिस्ट मुकेश कुमार सेन ने अम्बेडकर साहब को श्रद्धांजलि देते हुए बताया कि अम्बेडकर जी केवल एक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि उस क्रांति का नाम हैं जिसने भारत की सामाजिक संरचना को भीतर से झकझोरा। उन्होंने उस अंधेरे युग में जन्म लिया, जब अस्पृश्यता अपवित्र मानी जाती थी। लेकिन डॉ. अम्बेडकर जी ने हार नहीं मानी। ज्ञान को हथियार बनाया, शिक्षा को ढाल, और संघर्ष को अपना धर्म बनाया। वे अर्थशास्त्र, कानून, राजनीति, मानवाधिकार हर क्षेत्र के माहिर योद्धा थे।
6 दिसंबर को देश संविधान दिवस के शिल्पकार डॉ. अम्बेडकर की पुण्यतिथि के रूप में महापरिनिर्वाण दिवस मनाता है। उनके विचार आज भी उतने ही धारदार हैं जितने स्वतंत्रता के दौर में थे। “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो”, यह केवल उनका नारा नहीं, भविष्य की दिशा है।अम्बेडकर हमें सिखाते हैं कि बराबरी की लड़ाई कभी खत्म नहीं होती; उसे हर पीढ़ी को आगे बढ़ाना पड़ता है। उनकी विरासत न्याय, गरिमा और मानवता का वह दीपक है, जो सदियों तक रास्ता रोशन करता रहेगा।
अंत में सभी मरीजों ने नशा मुक्त होकर बाबासाहेब जी विचारों को आत्मसात कर भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने का संकल्प लिया.



