75 भाई-बहनों ने ली गुरू दीक्षा, करवाया पुंसवन संस्कार

जबलपुर दर्पण। एक मासीय चंद्रायण व्रत साधना संकल्प, नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ, गायत्री दीप यज्ञ एक शाम गुरुवर के नाम संगीत संध्या एवं अखंड जप के साथ गायत्री परिवार के संस्थापक युग ऋ षि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के श्री चरणों में अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए गायत्री परिवार के सभी परिजनों के द्वारा गुरु पूर्णिमा पर्व बड़े धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ गायत्री शक्तिपीठ, मनमोहन नगर एवं श्रीनाथ की तलैया तथा अन्य जगहों पर मनाया गया। इस अवसर पर 75 लोगों ने गुरु दीक्षा लेकर आचार्य जी को अपना गुरु वरण किया, 14 महिलाओं के पुंसवन संस्कार कराए गए। गायत्री के वरिष्ठ साधक एवं हरिद्वार प्रतिनिधि प्रकाश मुरझानी द्वारा बताया गया कि चंद्रायण व्रत गुरु पूर्णिमा से प्रारंभ होकर सावन पूर्णिमा तक चलता है, जिसके द्वारा साधक अपने कसाय कल्मश का निस्तारण कर उच्च स्तरीय साधना पथ पर स्वयं को लगाने का प्रयास करता है। इस साधना के द्वारा व्यक्ति को अनेक प्रकार के चमत्कारी अनुभव प्राप्त होते हैं। वरिष्ठ परिजन सी के मिश्रा ने बताया कि इस युग के आचार्य श्रीराम शर्मा एक मात्र ऐसे गुरु हैं, जिन्होंने 32 सौ से ज्यादा किताबें लिखी, 24 सौ से अधिक गायत्री शक्तिपीठ भारत में ही नहीं संपूर्ण विश्व में स्थापित की। जिनके माध्यम से आज ज्ञान का दीपक घर.घर में प्रज्ज्वलित हो रहा है। ऐसे सदगुरु के नैष्ठिक शिष्यों द्वारा समाज के नवनिर्माण के पुरजोर प्रयास किए जा रहे हैं।


