प्रशासनिक अधिकारियों एव खाकी की मिलीभगत के चलते,पानी में डूबने से दो बहनों की मौत

जबलपुर दर्पण पाटन ब्यूरो। पाटन के ग्राम उड़ना करैया में दो सगी बहनों के खेत में भरे पानी में डूबने से मृत्यु होने पर पूरे गांव में मातम छा गया। पाटन थाना प्रभारी इकबाल खान से मिली जानकारी अनुसार दिनाक 08/08/22 समय लगभग 4 बजे के आसपास ग्राम उड़ना करैया की महिलाएं एव बच्चे सावन महीने के आखिरी सोमवार को रुध अभिषेक पूजन कर मिट्टी से बने शकर भगवान और पूजन की हवन सामग्री को विसर्जन करने गांव के ही खेत में पानी भरा था,चुकी बरसात के दिनों में सभी खेतों में पानी भरा रहता है। करैया गांव की महिलाएं एव बच्चे गांव के ही एक खेत में जो मुड़ी लोधी का है जिसमें पानी भरा था पूजन सामग्री विसर्जन करने पहुंचे थे अचानक पैर फिसलने से निशा लोधी/ नेहा लोधी पिता पूरन सिंह लोधी उम्र 12 वर्ष एव 16 वर्ष पानी में डूब गई, चुकी पानी की गहराई ग्रामीणों के बताए अनुसार लगभग 20 फुट के आसपास होगी गांव वालों के द्वारा दोनो बच्चियों को पानी से बाहर निकाल कर एक बच्ची को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाटन लेकर आए जहां डाक्टरों ने निशा लोधी को मृत घोषित कर दिया वही बड़ी बहन नेहा लोधी को जबलपुर के मेट्रो अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उपचार के दौरान नेहा लोधी की भी दर्दनाक मौत हो गई। पंचनामा कार्यवाही कर शव को पीएम के लिए भिजवाते हुए मर्ग कायम कर जांच में लिया है।
ग्रामीणों का आरोप- उड़ना करैया गांव में खेतों की निचली परत में रेत निकलती है जिसके कारण इस इलाके में रेत माफिया सक्रिय है। खेत मालिकों को पैसे का प्रलोभन देकर या जबरन गुंडागर्दी से बिना शासन की अनुमति से रेत निकाल कर मोटी कमाई कर रहे है। रेत माफिया द्वारा खेतों में 20 से 30 फुट गहरे गड्ढे कर दिए गए है। जिससे आय दिन दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती हैं। ग्रामीणों का आरोप है रेत माफियाओं को पाटन एसडीएम कार्यालय एव पुलिस विभाग का संरक्षण प्राप्त है। जिसके कारण छोटी मोटी कार्यवाही कर हमेशा पाटन तहसील के मेन रेत माफिया को बचा लिया जाता है।
जिला कलेक्टर के निर्देशों को भी नही मानते पाटन एसडीएम एव तहशीलदार- जिला कलेक्टर के सक्त निर्देश पर माइनिंग विभाग द्वारा कोनी,बूढ़ी कोनी,मड़वा आदि ग्रामों में शासकीय भूमि पर किए गए अवैध रेत भंडारण को जप्त कर पाटन तहसीलदार एव पुलिस विभाग की उपस्थिति में ग्राम कोटवार को लगभग 800 हाईवा रेत जप्त कर सुपुर्द की गई थी। प्रशानिक अधिकारी एव पुलिस विभाग की मिलीभगत के चलते शासन की जप्त रेत माफियाओं के द्वारा लगातार परिवहन कर बेची जा रही है।
जब इस संबंध में पाटन थाना प्रभारी से बात की गई तो उनका कहना था कि – दोनों बच्चियों की मौत पानी में डूबने से हुई है। खेत से रेत निकलने की जानकारी नही है। और न ही जप्त रेत के परिवहन होने की जानकारी है। फिर भी दिखवाता हू।
प्रशासनिक एव थाना प्रभारियों की पहली पसंद खनिज संपदा वाले क्षेत्र ये बात सत्य है कि एसडीएम तहसीलदार एव थाना प्रभारियों की पहली पसंद में जहां खनिज संपदा जैसे मुरूम, रेत जहां जहां पर होती है ये अधिकारी उस इलाके में अपनी सेटिंग के चलते पोस्टिंग करा लेते है। और खनिज माफियाओं को सरक्षण देकर मोटी कमाई कर आपने आकाओं तक पहुंचाते है। जिसका परिणाम यह होता है कि कितनी भी शिकायत कर दो कोई कार्यवाही नहीं होती यदि ज्यादा बात बिगड़ जाय तो छोटी मोटी कार्यवाही कर अपनी ही पीठ धपधापा लेते है ये अधिकारी, और बड़े माफियाओं को बचा लेते है अधिकारी, जिसके कारण पाटन तहसील में प्रशानिक स्थिति बेहद चिंताजनक है।









