आकाशवाणी के माध्यम से लोक कलाकारों की स्थानीय प्रतिभा को मिलेगा व्यापक कवरेज : तरुण भनोत*

जबलपुर दर्पण। वर्तमान में प्रत्येक प्राइमरी चैनल से लगभग 16 घंटे का कूल प्रसारण हो रहा हैं, जिसमे से प्रसार भारती द्वारा नई नीतिगत दिशा-निर्देशों के अनुसार समन्वित भाग के लिए लगभग 30% समय ही दिया गया हैं एवं शेष 70% समय उस केंद्र की स्थानीय प्रतिभा के लिए पूरी तरह समर्पित हैं | उक्त जवाब केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर के द्वारा प्रदेश सरकार मे पूर्व वित्त मंत्री एवं जबलपुर पश्चिम से विधायक तरुण भनोत के द्वारा आकाशवाणी केंद्र जबलपुर से स्थानीय कार्यक्रमों को पुनः बहाल किए जाने के परिपेक्ष्य में प्रेषित पत्र के जवाब में दिया गया हैं। गौरतलब हैं कि मई 2022 में अचानक आकाशवाणी केंद्र जबलपुर के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा मौखिक रूप से रोक लगा दी गई थी | आकाशवाणी जबलपुर में अपनी प्रस्तुति देने वाले कलाकारों एवं पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल ने विधायक श्री भनोत से मिलकर आकाशवाणी केंद्र के अधिकारियों द्वारा लिए गए इस अन्यायपूर्ण निर्णय के खिलाफ अपना असंतोष व्यक्त किया गया था | इसी क्रम में विधायक विधायक श्री भनोत द्वारा स्थानीय कलाकारों और स्थानीय भाषाओं में होने वाले प्रसारणों को पुनः बहाल करने केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर को पत्र लिखकर मांग की गई थी। विधायक द्वारा प्रेषित पत्र के जवाब में केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने बताया कि प्रत्येक प्राइमरी चैनल से तैयार किए जा रहे कार्यक्रमों में सभी क्षेत्रीय भाषाओं की मात्रा और गुणवत्ता को बनाए रखा जा रहा हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक आकाशवाणी केंद्र से पुराने पैटर्न के आधार पर कृषि कार्यक्रमों का प्रसारण प्रतिदिन किया जा रहा हैं | इन स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा, विचारों और ज्ञान के प्रसार के लिए एक राज्य-व्यापी मंच मिल रहा हैं क्योंकि अब समन्वित कार्यक्रमों को मध्यप्रदेश के प्राइमरी चैनलों के सभी ट्रांसमीटरों से प्रसारित किया जा रहा हैं | वर्तमान में एक ही ट्रांसमीटर से प्रसारित किए जा रहे लोक-संगीत कार्यक्रमों को अब पूरे राज्य में सुना जा सकेगा। कार्यक्रमों पर मौखिक रोक लगने से लोक एवं स्थानीय कलाकारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था, किन्तु समन्वित कार्यक्रम को छोड़ दे तो लोक प्रस्तुति के लिए लगभग 11 घंटे का समय लोक कलाकारों को मिलेगा | स्थानीय भाषाओं में कार्यक्रम के प्रसारण से जहां एक तरफ श्रोताओं को क्षेत्रीय भाषा का लाभ मिलेगा वही लोक भाषा मे प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा, विचार और ज्ञान को लोकप्रियता मिलेगी।



