परिवार समाज में जो समन्वय बनाये वही श्रीकृष्ण रूक्मणी : स्वामी अशोकानंद

जबलपुर दर्पण। भगवान श्री कृष्ण रूक्मणी के सदृश समस्त परिवार को एक रूप से संचालित करना चाहिए । सांसारिक जीवन में 16108 पटरानियां के जैसे ही वृतियां है जिनका आचार विचार व्यवहार की प्रकृति भिन्न-भिन्न होती है जो समन्वय स्थापित करता है वो श्रीकृष्ण है । परिवार समाज में सामाजिक सांस्कृतिक और धार्मिक समन्वय बनाये रखना चाहिए।उक्त उद्गार नर्मदा मैया के तट पर भागवताचार्य स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने श्री भक्ति धाम सेवा समिति, भागवत सेवा समिती के तत्वावधान में भक्ति धाम ग्वारीघाट में श्रीमद्भागवत कथा में पितृ पक्ष के षष्ठम दिन श्रीकृष्ण रूक्मणी मंगल की कथा में कहे।
श्रीमद्भागवत पुराण, महाराज जी का पूजन अर्चन आरती पं वेदांत शर्मा, अरूण शर्मा, करिश्मा शर्मा, पं आशीष लालू महराज, पं पुष्पराज तिवारी, पप्पू लालवानी, विजय पंजवानी, उमेश पारवानी, घनश्याम, जगदीश दीवान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त जनों की उपस्थिति रही। आज श्रीमद्भागवत कथा में सुदामा चरित्र की व्याख्या सायं 4 बजे से प्रारंभ होगी।



