भगवान ने ध्वस्त किया इंद्र का अहंकार

जबलपुर दर्पण। एक समय इंद्र को ये अहंकार हो गया कि उनके होने से ही सृष्टि गतिमान है और यदि वो न हों तो कुछ नहीं रहेगा। भगवान कृष्ण ने अपनी लीला से इंद्र के अहंकार को ध्वस्त किया और उनसे कहा कि लोककल्याण के लिए कार्य करें परन्तु अहंकार न करो। ये प्रसंग आज गोकलपुर सामुदायिक भवन में जारी श्रीमद भागवत कथा के दौरान उपस्थित हुआ। कथा व्यास दीदी प्रियदर्शिनी ने अपनी ओजपूर्ण भाषा में ऐसा वर्णन किया कि भक्तजन भाव-विभोर हो उठे। इसी क्रम में, दीदी ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का माधुर्यपूर्ण वर्णन किया। नटखट कान्हा कैसे माखन चुराकर खाते थे और कैसे गोपियों को सताते थे, इसका सजीव वर्णन किया गया। गोवर्धन पूजन का वर्णन करते हुए दीदी ने बताया कि ये वास्तविक रूप से गौ व वनों के संवर्धन का प्रतीक है और वर्तमान युग में इसकी प्रासंगिकता बढ़ गयी है। इस अवसर पर यजमान भागचंद यादव ,दुर्गा बाई यादव,विभा कोस्टा,लीला बाई ठाकुर,डेलन सिंह,कृष्णा देवी ,घनश्याम बेन ,अनिता बेन,बाबूलाल गोस्वामी,मायादेवी गोस्वामी,सुमित्रा बाई यादव,सोना बाई यादव,सरस्वती कुशवाहा, धनबति ठाकुर,सुनील ठाकुर,संजीवनी ठाकुर,आशा ठाकुर,उत्तरा दहिया,श्रीधन सिंह,ललिता सिंह,विजय बुंदेला,सुनीता बुंदेला,सुन्दर सिंह,माया सिंह,हरदौल सिंह,गुल्लो सिंह,नरेन्द्र सिंह,सोनम सिंह,संतोष सिंह,नेहा सिंह
सतीश सिंह,रितु सिंह,सुनीता यादव ,कल्पना पाण्डेय व
अर्जुन कुमार सोनी की विशेष उपस्थिति रही।



