क्या किसान देश के प्रधान के लिए मुर्दाबाद कह सकता है?
विरोध का अधिकार है, किंतु मर्यादा का ध्यान रहे : स्वामी राघव देवाचार्य।
जबलपुर। मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि बिल के ऊपर जहां एक और राजनीतिक दल अपनी अपनी रोटियां सेकने में लगे हैं। वहीं दूसरी तरफ किसान अपने हक और अधिकार को छिनता हुआ समझ रहे हैं। अब इस बिल का समर्थन करने वाले किसानों की भी कमी नहीं है। लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी सभी के लिए है और सभी को अपनी बात रखने का अधिकार भी है। लेकिन यदि मर्यादा का उल्लंघन करके हम अपनी बात को सरकार के सामने रखते हैं। तो संदेश अच्छा नहीं जाएगा। जिस उद्देश्य के लिए हम लड़ रहे हैं। वह उद्देश्य भी हमसे दूर हो जाएगा और बातचीत के रास्ते अवरुद्ध होंगे। यह कहना है जगतगुरु द्वाराचार्य स्वामी राघव देवाचार्य, अखिल भारतीय श्री पंच दिगंबर अनी अखाड़ा, का।आंदोलनरत किसानों की बातों को सुनते समझते हुए उन्होंने अपने विचार मीडिया के सामने व्यक्त किए। साथ ही उन्होंने कहा कि किसान कभी भी देश के प्रधानमंत्री के लिए मुर्दाबाद नहीं कह सकता। किसी मामले में हमारे वैचारिक और राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री के पद की गरिमा इस देश में सर्वोच्च गरिमामय पदों में से एक है। यही हमारी खूबी भी है कि हमें चुने हुए प्रतिनिधियों के द्वारा चुनी गई। सरकार और सरकार के शीर्ष पदों पर बैठे व्यक्तियों के पद का सम्मान करना चाहिए। हम उनके आगे जो भी बात रखें, उसमें हमारी अपनी भाषा की मर्यादा। हमारे उद्देश्य और हमारी बातों को प्रमुखता से लोगों के सामने रखेगी। लेकिन यदि हम हल्की भाषा और ओछे शब्दों का प्रयोग करेंगे। तो इससे हम अपने उद्देश्य से भी भटक जाएंगे।



