कोनी के जंगल में,अवैध 840 हाईवा जप्त रेत स्टॉक की नीलामी पर,प्रशासन मौन क्यों..?

किसके इशारे पर जप्त रेत का परिवहन किया जा रहा है:एसडीएम पाटन की फटकार के बाद भी खनिज अधिकारी ने क्यों साधी चुप्पी
जबलपुर दर्पण पाटन ब्यूरो। जिले के खनिज अधिकारी लंबे समय से जबलपुर जिले के खनिज विभाग में अंगद के पैर की तरह जमे है। खनिज माफियाओं से साठ गांठ करके अपने कर्तव्य का सही ढंग से निर्वाहन न करके खनिज माफियाओं को अवैध खनन एवं परिवहन की खुली छूट दे रखी है। उसके एवज में खनिज विभाग जिले से करोड़ों रुपए की अवैध वसूली करता है। नोटों की हरियाली की वजह से खनिज विभाग को कही भी अवैध उत्खनन एवं परिवहन दिखाई नहीं पड़ता ऐसा ही एक मामला जिले की पाटन तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव कोनी का है जहां हिरण नदी से रेत माफियाओं द्वारा अवैध उत्खनन कर के कोनी के जंगलों में 840 हाईवा रेत का स्टाक कर लिया था। जिसकी खबर जबलपुर दर्पण में प्रमुखता से प्रकाशित की थी जिसको संज्ञान में लेकर जिला कलेक्टर के निर्देश पर खनिज विभाग,राजस्व विभाग पाटन एवं पुलिस की सयुक्त टीम द्वारा कोनी के जंगल में छापेमारी कर के 840 हाईवा अवैध रेत जप्त करके ग्राम कोटवार के हवाले कर दी थी। पाटन राजस्व विभाग ने खनिज विभाग को सूचित किया था उक्त रेत की जल्द से जल्द नीलामी की जाय जिससे रेत माफियाओं जप्त रेत का परिवहन न कर सके साथ ही नीलामी होने पर शासन को राजस्व प्राप्त होगा। लेकिन खनिज विभाग के अधिकारी प्रदीप तिवारी एवं उनकी लापरवाह टीम अपने राजस्व वसूली के चक्कर में उक्त जप्त रेत की आज दिनांक तक नीलामी नहीं करा पाए और रेत माफिया दिन रात जप्त रेत का परिवहन कर रहे है। खनिज विभाग के अधिकारी पाटन एसडीएम के निर्देशों को भी नहीं मान रहे है। मौके पर जप्त रेत की वसूली क्या गरीब कोटवार से होगी या फिर खनिज विभाग के लापरवाह अधिकारियों से की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों के सक्त निर्देशों का फिलहाल खनिज विभाग के अधिकारियों पर कोई फर्क पड़ता दिखाई नहीं दे रहा है वह अपने हिसाब से काम करते है। क्योंकि उनके संबध शहर से लेकर राजधानी तक है अब देखना होगा 840 हाईवा जप्त रेत का खनिज विभाग लीपापोती कैसे और किस रूप में करता है। इस संबंध में जब खनिज अधिकारी प्रदीप तिवारी से बात करने की कोशिश की गई तो उनका मोबाइल रिसीव नहीं हुआ।



