मृत तेंदुए ने खोले घुघरा प्लांट के ‘जंगल राज’ के राज

मनीष श्रीवास, जबलपुर दर्पण । जबलपुर जिले के सिहोरा वन परिक्षेत्र सीमा के अंतर्गत आने वाले घुघरा क्षेत्र में वन्यजीवों की लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते सप्ताह यहां तीन जंगली सुअरों के शव दफनाने और शिकार की जांच अभी अधूरी ही थी कि शुक्रवार रात एक तेंदुए का शव मिलने से फिर हड़कंप मच गया।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह घटना हरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र के ग्राम घुघरा में स्थित निसर्ग इस्पात प्राइवेट लिमिटेड प्लांट (मालिक – महेंद्र गोयनका) की 250 एकड़ भूमि में सामने आई, जहां पहले भी वन्यजीवों के शिकार और दफनाने की खबरें मिल चुकी हैं। शनिवार को झाड़ियों के बीच एक वर्षीय नर तेंदुए का शव पाया गया। बताया गया कि तेंदुए के दांत और नाखून उखड़े हुए थे, जिससे शिकार की संभावना और गहरा गई है।
▪️ पहले भी मिली थी शिकार की घटनाएं
घुघरा क्षेत्र में पिछले सप्ताह ही तीन जंगली सुअरों के शव बरामद हुए थे। स्थानीय ग्रामीणों और समाजसेवियों ने बताया कि यहां कृत्रिम जलकुंड और ऊंचे मचान बनाकर शिकार के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में लंबे समय से वन्यजीवों का अवैध शिकार किया जा रहा है, जिसमें विभागीय मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता।
▪️ जांच में जुटा वन विभाग
सूचना मिलने पर डीएफओ जबलपुर ऋषि मिश्रा और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। मंडला से डॉग स्क्वॉड बुलाया गया और घटनास्थल की जांच शुरू की गई।
डीएफओ ऋषि मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा,
“वन्यजीवों की मौतें समय-समय पर होती रहती हैं। उनकी सुरक्षा और निगरानी की पूरी जिम्मेदारी हमारी है, जांच जारी है।”
हालांकि, लगातार हो रही मौतों और आरोपों के बीच वन विभाग द्वारा प्लांट को सील न किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वन्यजीवों की सुरक्षा पर संकट और गहराएगा।
▪️ स्थानीय स्तर पर नाराज़गी
ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने आरोप लगाया कि विभाग केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर खानापूर्ति करता है, जबकि असली जिम्मेदारों को बचाया जा रहा है।
लोगों का कहना है कि “यदि विभाग ने समय रहते सख्त कदम उठाए होते, तो तेंदुए और जंगली सुअरों की मौतें रोकी जा सकती थीं।”



