जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

ग्रामोदय महोत्सव का हुआ शुभारंभ

जैविक विज्ञान संगोष्ठी और ग्रामोदय व्याख्यान माला का उदघाटन

जबलपुर दर्पण चित्रकूट। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय परिसर में पंच दिवसीय ग्रामोदय महोत्सव का शुभारंभ हुआ। कुलपति प्रो भरत मिश्रा ने इस दौरान वृक्ष रोपण किया। महोत्सव के पहले दिन हाइब्रिड मोड़ में दो दिवसीय जैविक विज्ञान संगोष्ठी का उद्घाटन किया गया। उदघाटन सत्र के मुख्य अतिथि विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलपति प्रो ए के पांडेय रहे। अध्यक्षता महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो भरत मिश्रा ने की।विशिष्ट अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के चेयरमैन प्रो भारत शरण सिंह, दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, जर्मनी के जैविक विज्ञान विशेषज्ञ डॉ अल्चरिच वर्क , नासी प्रयागराज के संयुक्त सचिव डॉ यूसी श्रीवास्तव और आयोजन समिति के चेयरमैन प्रो आई पी त्रिपाठी व आयोजन सचिव प्रो आर सी त्रिपाठी रहे। इस अवसर पर अतिथियों ने संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन किया गया। सोसाइटी ऑफ लाइफ साइंसेस ने लाइफ टाइम अचीवमेंट, रिकग्निशन व यंग साइंटिस्ट अवार्डस भी प्रदान किये।
आयोजन के प्रथम दिन सीएमसीएल डीपी सभागार में पदमश्री जल योद्धा उमाशंकर पांडेय ग्राम जखनी का जल की उपयोगिता , महत्व व संरक्षण पर विशेष व्याख्यान हुआ। कृषि परिसर में कुलपति प्रो भरत मिश्रा सहित यूनिवर्सिटी के प्राध्यापकों ने वृक्ष रोपण कर ग्रामोदय महोत्सव के अवसर पर वृक्ष लगाने की परंपरा का प्रारंभ किया।अन्य कार्यक्रमों में खेल, बौद्धिक, सांस्कृतिक व ललितकला से से सम्बंधित स्पर्धाएं संपन्न हुई।
ग्रामोदय महोत्सव के कार्यक्रमों का प्रारंभ सीएमसीएलडीपी सभागार में अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना, कुलगीत प्रस्तुत किया।राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन सचिव व प्रभारी कुलसचिव प्रो आर सी त्रिपाठी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए राष्ट्रीय संगोष्ठी पृष्टभूमि व औचित्य पर प्रकाश डाला।विषय प्रवर्तन नासी प्रयागराज के संयुक्त सचिव प्रो यू सी श्रीवास्तव ने मौसम एवं जलवायु परिवर्तन आदि समसामयिक विषयों पर विचार व्यक्त करते हुए ग्लोबल वार्मिंग के संकेतों को बताया।प्रो श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों पर भी चर्चा की।
मुख्य अतिथि प्रो प्रोफेसर ए के पांडे कुलपति विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन ने वेदों में उपलब्ध जानकारी का वर्णन करते हुए कहा कि वेदों में सतत विकास के लिए मार्गदर्शन दिया गया है। इस परंपरागत ज्ञान को आत्मसात कर संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित सतत विकास के लक्ष्यों को सरलता से प्राप्त कर सकते हैं। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर भरत मिश्रा ने कहा कि संगोष्ठी का महत्व तब और अधिक बढ़ जाएगा जब हम संगोष्ठी में आये विचारों और लिए गए निर्णय को लागू कराने के लिए दृढ़ संकल्पित होंगे। विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर भारत शरण सिंह चेयरमैन निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग भोपाल जैविक विज्ञान की चर्चा करते हुए जलवायु परिवर्तन के कारण एवं जय विविधता के जैव विविधता के संरक्षण पर विचार व्यक्त किए। विशिष्ट अतिथि अभय महाजन संगठन सचिव दीनदयाल शोध संस्थान ने कहा कि भारत रत्न राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख के वैचारिक दर्शन में पर्यावरण को विशेष महत्व दिया गया है। श्री महाजन ने कहा कि विगत वर्ष दीनदयाल शोध संस्थान व महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय ने मिलकर सतत विकास के लक्ष्य एवं उनके प्राप्ति के उपायों पर विमर्श का आयोजन किया था। इस संगोष्ठी में नाना जी के विचारों पर भी चर्चा होनी चाहिये। विशिष्ट अतिथि अल्चरिच वर्क जर्मनी ने जैव विविधता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खाद्य श्रृंखला के किसी भी घटक को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। प्रोफेसर आई पी त्रिपाठी अधिष्ठाता विज्ञान एवं चेयरमैन आयोजन समिति ने धन्यवाद ज्ञापन किया। संचालन डॉ वंदना पाठक ने किया।

पदमश्री उमाशंकर पांडेय ने दिया मार्गदर्शक व्याख्यान

ग्रामोदय महोत्सव के आयोजन की श्रृंखला में पहले दिन ग्रामोदय व्याख्यान माला का आयोजन हुआ, जिसमें पदमश्री जल योद्धा उमाशंकर पांडेय ने जखनी गांव के हर खेत को मेड व हर मेड में पेड़ मॉडल पर विस्तार से चर्चा करते कहा कि छोटे प्रयास की निरंतरता से ही बड़े परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं।उन्होंने अपने गांव जखनी मॉडल का श्रेय भारत रत्न नाना जी देशमुख को देते हुए कहा कि उन्ही के मार्गदर्शन से प्रेरित जखनी का खेत, मेड, पेड़ मॉडल आज दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। पदमश्री पांडेय ने जखनी गांव के इतिहास औऱ वर्तमान स्थिति पर चर्चा हुए परिवर्तन की बड़ी झांकी प्रस्तुत की। उन्होंने जीवन के पानी के महत्व पर जानकारी देते हुए कहा कि पानी को बचाना चाहिए। पानी के संरक्षण का काम केवल सरकार का नही बल्कि समुदाय का होना चाहिये।समुदाय के सहयोग व सहभागिता से पानी के लिए जखनी गांव का उदाहरण पर्याप्त है। पानी की उपलब्धता के कारण ही इस छेत्र के किसानों की आय में आश्चर्यजनक बृद्धि हुई है। पदमश्री पांडेय ने ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि मुझे विश्वास है कि कुलपति प्रो भरत मिश्रा के नेतृत्व में ग्रामोदय विश्वविद्यालय नाना जी के विचारों के अनुरूप विकसित होगा।पदमश्री पांडेय ने ग्रामोदय विश्वविद्यालय के विकास के लिए हर सम्भव सहयोग का आश्वासन दिया।इस अवसर पर कुलपति प्रो भरत मिश्रा ने पदमश्री उमाशंकर पांडेय का स्वागत सम्मान किया।ग्रामोदय व्याख्यान माला में विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो ए के पांडेय व निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के चेयरमैन प्रो भारत शरण सिंह भी मौजूद रहे। व्याख्यान माला के संयोजक प्रो आई पी त्रिपाठी अधिष्ठाता विज्ञान संकाय ने धन्यवाद ज्ञापन किया।खेल स्पर्धा की कड़ी में रेस एवं पुरूष कूद, महिला कूद हुई। खेल स्पर्धा का संयोजन डॉ विनोद कुमार सिंह ने किया।

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