सीमित संबंधों तक रह गए परिवार

प्रसंग अंतर्राष्ट्रीय साहित्य संस्था के तत्वावधान में हमारा परिवार विषय पर बृहद संगोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में साहित्यकार मोहन शशि ने कहा परिवार को लेकर आज चिंतन और चिंता का विषय हैअध्यक्षता करते हुए डॉ कृष्णकांत चतुर्वेदी वरिष्ठ चिंतक, विचारक ने बताया कि सीमित संबंधों तक ही परिवार की परिभाषा रह गई है जबकि परिवार शब्द अपने आप में विस्तार का सूचक हैसारस्वत अतिथि डॉ. संगीता भरद्वाज ने परिवार पर इसकी उपादेयता पर प्रकाश डालाविशिष्ट अतिथि के रूप में मनोहर चौबे’ सुशील श्रीवास्तव’ अर्चना द्विवेदी’ डॉ अलका मधुसूदन पटेल’ ने इस प्रकार की आयोजनों को आज समाज की प्राथमिकता बताया* इंजी. विनोद नयन द्वारा संपूर्ण आयोजन पर प्रकाश डालते हुए मंगल भाव प्रस्तुत किए इसके साथ ही सुश्री अन्विता मौली द्वारा प्रस्तुतसरस्वती वंदना से संगोष्ठी प्रारंभ हुई* जिसमें बसंत कुमार शर्मा, प्रभा बच्चन श्रीवास्तव, राजकुमारी रैकवार, दुर्गा सिंह पटेल, प्रो. मंजूरी गुरु, डॉ विनीता पांडे, नवनीता चौरसिया, कोमल साकल्ल, सिद्धेश्वरी सराफ, सुश्री अस्मिता शैली, रमेश श्रीवास्तव, उमा मिश्रा, कीर्ति चौरसिया, डॉ प्रदीप कुमार, मथुरा प्रसाद कोरी, तरुण खरे, आरती श्रीवास्तव, डॉ मनोरमा गुप्ता, उमा झुरेले, अर्चना शर्मा, रजनी कटारे ,भारती पाराशर, मदन श्रीवास्तव, सुभाष शलभ, योगिता चौरसिया, गायत्री नीरज चौबे, डॉ छाया त्रिवेदी एड. तृप्ति त्रिवेदी, अर्चना द्विवेदी डॉ.छाया सिंह, डा. मकबूल अली ,राजेश लखेरा, डॉ. प्रार्थना अर्गल, डॉ आशा श्रीवास्तव, सुशील श्रीवास्तव, डॉ चंदा देवी स्वर्णकार, डॉ संध्या शुक्ला, मंजू जयसवाल, प्रदीप नामदेव, एवं कालिदास काली ने हमारा परिवार पर शानदार रचनाओं का पाठ किया अंत में समस्त रचनाकारों का काबिल शिरोमणि सम्मान प्रदान किए गए संचालन डा.रानू रुही एवं डॉ मुकुल तिवारी ने किया अंत में आभार प्रदर्शन बसंत कुमार शर्मा द्वारा किया गया



