पिता हिमालय हैं तो मां गंगा है
जबलपुर – प्रसंग अंतरराष्ट्रीय काव्य मंच के तत्वावधान में मेरे बाबूजी विषय पर बृहद ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में पधारे कविवर मोहन शशि ने कहा
उंगली पकड़ चलाने वाले
जग का भान कराने वाले
किस विधि चरण पखारु जी
बाबू जी मेरे प्यारे बाबू जी
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉक्टर कृष्ण कांत चतुर्वेदी ने कहा
हमारे परिवार में एक ऐसे व्यक्ति का पावन स्थान होता है जो हम सबको को संरक्षण देता है जिसे हम पिता कहते हैं इसलिए हम कह सकते हैं पिता हिमालय है तो मां गंगा होती है
सारस्वत अतिथि के रूप में कवयित्री नवनीता चौरसिया ने कहा इस तरह के समसामयिक आयोजन वर्तमान समय की मांग है प्रसंग का साधुवाद
विशिष्ट अतिथि की आसंदी से डॉ प्रदीप उप्पल, डॉ विनीता पांडे, अर्चना द्विवेदी ने कहा विषय देखकर कविताएं लिखवाना यह एक श्रेष्ठ कार्य है इसी भाव से संस्था निरंतर साहित्य की सेवा कर रही है
संस्था के संस्थापक इंजी. विनोद नयन द्वारा संपूर्ण संगोष्ठी की महत्ता पर प्रकाश डाला
सुश्री अस्मिता शैली द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना के साथ ही संगोष्ठी प्रारंभ हुई जिसमें मंजू जायसवाल, दिनेश सेन, डा.अलका पटेल, डॉ विनीता पांडे, डॉ प्रदीप उप्पल, योगिता चौरसिया, तृप्ति त्रिवेदी, नवनीता चौरसिया, राजकुमारी रैकवार, मथुरा प्रसाद कोरी, वंदना दुबे, डॉ. संगीता भारद्वाज, रमेश श्रीवास्तव, कीर्ति चौरसिया, सिद्धेश्वरी सराफ, उमा मिश्रा, अर्चना शर्मा, सुभाष शलभ, दुर्गा सिंह पटेल, मदन श्रीवास्तव, डॉ मुकुल तिवारी, कुमारी कोमल साकल्ले, डॉ. संध्या शुक्ला, गायत्री नीरज चौबे, तरुणा खरे, जगत राज प्रजापति, अर्चना द्विवेदी, राजेश लखेरा, निर्मला डोंगरे, डॉ. मनोरमा गुप्ता, उमा सुहाने, उमा झुरेले, महेंद्र मोती, रत्ना ओझा, निर्मला तिवारी, आरती श्रीवास्तव, डॉ. गीता पांडे, डॉ. प्रार्थना अर्गल, प्रभा पहारिया, मनोहर चौबे, आदि रचनाकारों ने हमारे बाबूजी बिषय पर शानदार रचनाओं का पाठ किया अंत में सभी रचनाकारों को जनक सम्मान से अलंकृत किया गया संयोजन डा.रानू रुही, संचालन डॉ मुकुल तिवारी, एवं आभार प्रदर्शन बसंत शर्मा ने किया



