जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

अवकाशो में असमानता से शिक्षकों में असंतोष

जबलपुर –

शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों…?

शिक्षकों के साथ दोहरा मापदंड क्यों….?

सेवाकालीन प्रशिक्षण शिविर ग्रीष्मकालीन अवकाश में आयोजित ना किये जायें -मांग

मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार शिक्षकों को भी अन्य कर्मचारियों की भांति अवकाश सुविधाएं मिलनी चाहिए।
मध्यप्रदेश में शिक्षकों के तथा अन्य कर्मचारियों चाहे वो किसी भी विभाग के हों, उनके अवकाशों में समानता नहीं है।मध्यप्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग और जनजाति विभाग में कार्यरत शिक्षकों को सप्ताह में 6 दिन कार्य की अनिवार्यता है।वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश शासन के गैर शिक्षकीय अमले अर्थात विभिन्न कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों को 5 दिवस कार्य करने का आदेश है इस तरह गैर शिक्षकीय अमले कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों को शिक्षकों की तुलना में 52 दिवस का अवकाश स्वतः ही मिल रहा है।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर ने आगे बताया कि मध्यप्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग एवं जनजाति कार्य विभाग में शासन द्वारा अधिकृत तौर पर प्रति वर्ष ग्रीष्म कालीन अवकाश घोषित किया जाता है ग्रीष्म कालीन अवकाश का आदेश केवल कागजों में ही विधिवत देखा जाता है क्योंकि विभाग द्वारा प्रति वर्ष कोई ना कोई जानकारी जैसे जाति प्रमाण पत्र, खेलकूद के नाम पर समर कैंप,नव साक्षरता मिशन कार्यक्रम,शाला भवन की रंगाई -पुताई -मरम्मत कार्य, विद्युत आपूर्ति व्यवस्था,फर्नीचर (टेबिल- कुर्सी ) मरम्मत,पेयजल आपूर्ति व्यवस्था,5 वीं तथा 8 वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम, टी. सी. वितरण,नव प्रवेश के लिए सर्वे,शाला -त्यागी एवं अप्रवेशी छात्र -छात्राओं की जानकारी, विद्यार्थियों की मैपिंग,असफल छात्रवृत्ति के बैंक खातों की जानकारी, निशुल्क पाठ्य पुस्तक वितरण कार्यक्रम के तहत पुस्तकों का संग्रहण -वितरण, डाक व्यवस्था और सर्वोच्च प्राथमिकता वाले जन -सेवा के अनेक प्रकार के कार्य जैसे दर्जनों कार्य शिक्षकों से कराये जाते है।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर ने आगे बताया कि स्थानीय अवकाश की प्रक्रिया माननीय जिला कलेक्टर जी के कार्यालय के लिपिकों द्वारा उनकी सुविधा अनुसार तय किए जाते हैं जैसे 2 स्थानीय अवकाश शिक्षकों के दशहरा और दीपावली अवकाश में भी होते हैं वास्तव में जिनका लाभ अलग से मिलना चाहिए।वर्ष में अनेकों बार रविवार को भी सरकारी आदेश से कार्य कराये जाते हैँ अर्थात जब शिक्षकों को वर्ष भर छोड़ा ही नहीं जाता है और तो और नवीन शैक्षिक सत्र में नवीन ऊर्जा,नवीन उमंग- उल्लास और स्फूर्ति के साथ अपने-अपने विद्यालय के छात्र- छात्राओं को बेहतर अध्यापन कार्य करवाने की जबाबदारी भी शिक्षकों पर ही होती है।ये शिक्षकों के साथ सरासर अन्याय एवं भेदभाव है।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर के अनुसार ग्रीष्म कालीन अवकाश में किसी भी प्रकार की ड्यूटी शिक्षकों से कराई जाती है तो शासन के नियमानुसार अन्य कर्मचारियों की भांति उन्हें भी अर्जित अवकाश प्रदान किए जाने के आदेश भी जारी होने चाहिए साथ ही साथ शिक्षकों के लिए भी 5 दिवसीय कार्य सप्ताह भी अन्य कर्मचारियों की भांति प्रारम्भ किया जाना चाहिए जिससे की शिक्षकों में व्याप्त भारी असंतोष और असमानता की हीन भावना को कम किया जा सके।
मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के दिलीप सिंह ठाकुर, भास्कर गुप्ता, सतीश खरे, निरंद सिंह, जी आर झारिया,अफ़रोज़ खान, रवि केवट,दुर्गेश खातरकर, ऋषि पाठक, विश्वनाथ सिंह, संजय उपाध्याय, नितिन तिवारी, धर्मेंद्र परिहार, शैलेश पंड्या, रवि विश्वकर्मा, अरविन्द विश्वकर्मा, बैजनाथ यादव, आकाश भील, पंकज हल्दकार,देवेंद्र राजपूत,आदेश विश्वकर्मा, अजब सिंह,सुधीर गौर,सुल्तान सिंह, देवराज सिंह, इमरत सेन, महेश मेहरा, भोजराज विश्वकर्मा, आशीष विश्वकर्मा, माधव पाण्डेय, विशाल सिंह, देव सिंह भवेदी, सुरेंद्र परसते,अंजनी उपाध्याय, चंद्रभान साहू, गंगाराम साहू, भोगीराम चौकसे, मोदित रजक, पुष्पा रघुवंशी, कल्पना ठाकुर, अर्चना भट्ट, रेनू बुनकर, शबनम खान, गीता कोल, सरोज कोल, राजेश्वरी दुबे, अम्बिका हँतिमारे, ब्रजवती आर्मो, सुमिता इंगले, प्रेमवती सोयाम, योगिता नंदेश्वर, पूर्णिमा बेन, चंदा सोनी, भागीरथ परसते, आसाराम झारिया, समर सिंह, अजय श्रीपाल, मदन पांन्द्रो, मनोज कोल, पवन सोयाम, रामदयाल उइके, रामकिशोर इपाचे, राकेश मून, शायदा खान,राशिद अली,संतोष श्रीवास्तव, संतोष चौरसिया, गोपी शाह, डेलन सिंह, लोचन सिंह,सपना रजक, रौशनी महोबिया इत्यादि ने मांग की है, कि अभी हाल ही में जो अर्जित अवकाश के आदेश कार्यालय कलेक्ट्रेट (जिला शिक्षा केंद्र) से जारी हो रहें हैँ इसमें केवल उनको लाभ मिलेगा जिनकी ड्यूटी माननीय जिला कलेक्टर जी के अनुमोदन से विभाग द्वारा अधिकृत तौर पर लगायी गयी है। ड्यूटी में लगे सभी को अर्जित अवकाश का लाभ मिलेगा।इसमें संशोधन किया जाना चाहिए क्योंकि सेवाकालीन प्रशिक्षण शिविर भी ग्रीष्म कालीन अवकाश में ही आयोजित किये जाते हैँ तो फिर अवकाश किस बात का होता है या तो इसके बदले अर्जित अवकाश प्रदान किया जावे या फिर सेवा कालीन प्रशिक्षण शिविर जुलाई से मार्च के मध्य आयोजित किये जावें।

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